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हिन्दी साहित्य का माध्यमिककाल/सूरदास अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित पुस्तक हिंदी भाषा और उसके साहित्य का विकास का एक अंश है। इस पुस्तक का प्रकाशन १९३४ ई॰ में पटना विश्वविद्यालय, पटना द्वारा किया गया था।


"सोलहवीं शताब्दी में ही हिन्दी संसार के सामने साहित्य गगन के उन उज्ज्वलतम तीन तारों का उदय हुआ जिनकी ज्योति से वह आज तक ज्योतिर्मान है ! उनके विषय में चिर-प्रचलित सर्वसम्मति यह है:---

सूर सूर तुलसी ससी उडुगन केसव दास ।
अब के कवि खद्योत सम जहँ तहँ करत प्रकास॥
काव्य करैया तीन हैं, तुलसी केशव सूर।
कविता खेती इन लुनी, सीला बिनतमजूर॥

यह सम्मति कहां तक मान्य है, इस विषयमें मैं विशेष तर्क वितर्क नहीं करना चाहता। परन्तु यह मैं अवश्य कहूंगा कि इस प्रकार के सर्व-साधा- रण के विचार उपेक्षा-योग्य नहीं होते, वे किसी आधार पर होते हैं । इस- लिये उनमें तथ्य होता है और उनकी वहुमूल्यता प्रायः असंदिग्ध होती है।..."(पूरा पढ़ें)