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दुखी भारत/शिक्षा क्यों नहीं दी जाती? लाला लाजपत राय का द्वारा किए गए अनुवाद दुखी भारत का एक अंश है जिसका प्रकाशन सन् १९२८ ई॰ में प्रयाग के इंडियन प्रेस, लिमिटेड द्वारा किया गया था।


"मिस मेयो ने स्वयं भारत-सरकार के काग़जों में लिखी हुई इन सब बातों की उपेक्षा की है। पैसा बटोरनेवाले लेखक गम्भीर और सत्य विषयों को नहीं उपस्थित कर सकते। ऐसे लेखक भारतीयों की विषय-वासना को खींच-खाँच कर प्रत्येक बात के साथ जोड़ने का मदर इंडिया का ही ढङ्ग अधिक सुगम समझते हैं। अपनी पुस्तक के 'शिक्षा क्यों नहीं दी जाती?' शीर्षक अध्याय में उसने भारतवर्ष में चारों तरफ़ फैली निरक्षरता का कारण बताने की चेष्टा की है। वह हमें बतलाती है कि बिना अध्यापिकाओं के गाँवों में शिक्षा का प्रबन्ध नहीं किया जा सकता।..."(पूरा पढ़ें)