Download this featured text as an EPUB file. Download this featured text as a RTF file. Download this featured text as a PDF. Download this featured text as a MOBI file. Grab a download!

श्री विष्णु नारायण भातखण्डे आधुनिक काल के संगीत जगत की एक महत्वपूर्ण विभूति हैं। उनका जीवन परिचय वसंत द्वारा रचित संगीत विशारद पुस्तक के सङ्गीत प्रचार का आधुनिक काल नामक अध्याय में संकलित है। इसका प्रकाशन १९५४ ई॰ में प्रभूलाल गर्ग, हाथरस द्वारा किया गया।


"श्री विष्णु नारायण भातखण्डे का जन्म बम्बई प्रांत के बालकेश्वर नामक स्थान में १० अगस्त १८६० ई॰ को हुआ। इन्होंने १८८३ में बी॰ ए॰ और १८६० में एल-एल॰ बी॰ की परीक्षा पास की। इनकी लगन आरम्भ से ही सङ्गीत की ओर थी। १९०४ में आपकी ऐतिहासिक सङ्गीत यात्रा प्रारम्भ हुई, जिसमें आपने भारत के सैकड़ों स्थानों का भ्रमण करके सङ्गीत सम्बन्धी साहित्य की खोज की। बड़े-बड़े गायकों का सङ्गीत सुना और उनकी स्वरलिपियाँ तैयार करके "क्रमिक पुस्तक मालिका" में प्रकाशित कराईं, जिसके ६ भाग हैं। थ्योरी (शास्त्रीय) ज्ञान के लिये आपने हिन्दुस्थानी सङ्गीत पद्धति के ४ भाग मराठी भाषा में लिखे। संस्कृत भाषा में भी आपने लक्ष्यसङ्गीत और "अभिनव राग मंजरी" नामक पुस्तकें लिखकर प्राचीन सङ्गीत की विशेषताओं एवं उसमें फैली हुई भ्रान्तियों पर प्रकाश डाला।
इस प्रकार इन्होंने अपने अथक परिश्रम द्वारा सङ्गीत की महान सेवा की और संगीत जगत में एक नवीन युग स्थापित करके अन्त में १९ सितम्बर १९३६ को आप परलोक वासी हुए।..."(पूरा पढ़ें)