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भारतवर्ष-वैभव का घर लाला लाजपत राय द्वारा रचित दुखी भारत का एक अंश है जिसका प्रकाशन सन् १९२८ ई॰ में प्रयाग के इंडियन प्रेस, लिमिटेड द्वारा किया गया था।


"मदर इंडिया की लेखिका के लिए यह देश न केवल वर्तमान समय में बल्कि सदा से ही 'दरिद्रता का घर' रहा है। इस बात को वह पूरी गम्भीरता के साथ कहती है और अपनी सम्मतियों को ऐतिहासिक खोजों के आधार पर भी उपस्थित करने का ढोंग रचती है। परन्तु उसको इतिहास का उतना ही कम ज्ञान है जितनी शीघ्रता के साथ वह बिना विचारे अपनी सम्मतियाँ निश्चित करती है। उसका थोथा ऐतिहासिक ज्ञान उस समय उसे और भी नीचे गिरा देता है जिस समय वह सिक्खों के विद्रोह को १८४५ की घटना जताने लगती है। (पृष्ठ २५९) श्रीयुत एडवर्ड थामसन ठीक ही यह प्रश्न करते हैं कि आखिर सिक्खों के विद्रोह किया किसके विरुद्ध?..."(पूरा पढ़ें)