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अँगरेज़ी राज्य पर अँगरेजों की सम्मतियाँ लाला लाजपत राय द्वारा रचित दुखी भारत का एक अंश है जिसका प्रकाशन प्रयाग के इंडियन प्रेस, लिमिटेड द्वारा १९२८ ई॰ में किया गया।


"लन्दन 'डेली हेरल्ड' के भूतपूर्व संपादक मिस्टर जार्ज लैंसवरी ने ११ दिसम्बर १९२० ईसवी को एज़ेक्स हाल में व्याख्यान देते हुए कहा था:-
"भारतवर्ष में ३० करोड़ से ज़्यादा मनुष्य हैं। ब्रिटिश द्वीपसमूह में हम अँगरेज़ लोग करोड़ हैं। हम लोग उनके हित के लिए उनकी अपेक्षा अधिक जानने का दावा करते हैं। क्या इससे भी अधिक निर्लज्जता कभी की गई थी? क्योंकि हमारा चमड़ा सफ़ेद है इसलिए हम उनकी अपेक्षा जिनका चमड़ा सूर्य ने काला कर दिया है, अधिक मस्तिष्क रखने का दावा करते हैं। जब मैं भारतवासियों को देखता हूँ तब मुझे अपने आप पर शर्म मालूम होती है। मैं भारतवर्ष के सम्बन्ध में उनकी अपेक्षा अधिक कैसे जान सकता हूँ।"..."(पूरा पढ़ें)