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जीवन और कला रामचन्द्र शुक्ल द्वारा रचित निबंध-संग्रह कला और आधुनिक प्रवृत्तियाँ में संकलित निबंध है जिसका प्रकाशन १९५८ ई. में प्रकाशन शाखा, सूचना विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया।


"जब चित्रकार और प्रकृति का सम्बन्ध प्रेमी और प्रेयसी का है तो प्रेमी अपनी प्रेयसी को क्षण भर के लिए भी आँखों से ओझल नहीं कर सकता और अकस्मात् यदि उसकी प्रेयसी को दुःख होता है, चोट पहुंचती है, तो वह उसे कदापि नहीं सहन कर सकता। उसकी प्रेयसी को चोट उसके ही भाई-बन्धु लगा सकते हैं। जापान में एटम बम गिरा। हिरोशिमा की सारी प्रकृति नष्ट-भ्रष्ट हो गयी। पिछले महायुद्ध में करोड़ों मनुष्य काल-कवलित हुए, घायल हुए और कुरूप हो गये। बीमारी, महामारी, भूख और तड़प ने लोगों को जर्जर कर दिया। सुकुमार बच्चों, कोमल युवतियों और अनेकों प्राणियों की सुन्दरता छिन गयी। यह सब किसने किया? मनुष्य ने अपनी सुन्दरता को अपने आप बिगाड़ लिया। कोई कलाकार क्या कभी ऐसा कर सकता है? या सोच सकता है? वह इसे कभी सहन नहीं कर सकता और यदि सब में यही कलाकार की भावना हो तो ऐसे कुरूप दृश्य देखने का कदाचित् ही किसी को अवसर मिले।..."(पूरा पढ़ें)