पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 4.djvu/८८

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करव पद्यम पड़ता १दधि- मिश्रित सच करमाल-करभि वाईका पुरोमें भी एक मन्दिर खड़ा है। इस मन्दिरमें | करमोदा (सं० स्त्री०) नदीविशेष, एक दरया। (विशु, मार्क और प्रशासपु.) जगत्राथमीको खिचड़ीका भोग लगता है (त्रि.) क्रियते, स-अम्बध् । छकदिवडिक- करमाल (हिं. पु.) कर्म, नसीब । यह शब्द केवल -टिभ्यो ऽम्वच्। मण् ॥८२ । १ मिश्रित, मिलावटी। (लो०) २ मिश्रण, मिलावट। (पु.)३ दधिमिथित खाद्य, करमाल (सं० पु०) करिशण्डः तदाकतिवत् माला दही मिला खाना। समूहो यस्य ।, १ धूम, धूवा । २ मेघ बादल । करबक, करम्ब देखी। करमाला (सं० स्त्री० ) करं करा लि-पर्व माला खत. (सं० वि०) करम्बमिवणं जातोऽस्य, करम्य- इव जपसंख्या हेतुत्वात्। करपर्वरूप माला, उंग-1 इतन् । १ मिथित,मिला हुवा। २ खचित,नड़ा हुवा। लियाँक पोरकी जपनी। अनामिकाके मध्यसे कनि- "मधुकरनिकर करवित कोकिलजित कुनकटौर।" (गीतगोविन्द) ठादि क्रम पर तर्जनीक मूलपवं पर्यन्त क्रमशः करवी सं. स्त्र.) कलम्बी भाक, एका सब्जी। दश बार जप करनेको करमाना कहते हैं। इसमें कलम्बी देखी। मध्यमाका मूल और मध्य पर्व छूट जाता है। • करम्भ . (स.पु.) केन जलेन रभ्यते एकत्रीक्रियते "पारभ्यानामिकामध्यं दक्षिणावर्तयोगतः । धातूनामनेकार्थत्वात् क-रम्भ-धज । अतरिच कारकै मनोमलपर्यन्न करमाला प्रकीर्तिता" (न्नसार) इंधायाम् । पा ।।१९। रमेरभ लिटौः। पा ११६५। करमाली (सं० पु०.) सूर्य, भाताव । दहीदार सत्तू। २ दग्ध यवमात्र, करमी (हिं० वि.) कर्मकारी, काम करनेवाला । चवेना, बहुरो। ३पविरल पिष्ठ यव, दरा हुवा करमुंडा (हिं० वि०) १ मणवर्ण मुखविशिष्ट, · दामा। ४ मिश्रगन्ध, मिलावटी बू। ५ प्रियङ्ग फन । काला दहन रखनेवाला। २ कलयुक्ता, बदनाम । ६ शतमूली, सतावर। ७ शकुनिके पुत्र और देवरातक करमुक्ता ( सं० लो० ) करण गृहीत्वा अरातिं प्रति ८ रम्भके धाता। बक्सार-निर्यासविष, मुच्यते, कर मुच-त । निष्ठा। पा १०१।१ अस्त्रभेद, एक जहर। १० पुष्पविशेष, एक फूल । बरछा । (त्रि०) २ इस्तच्युत, हाथसे छूटा हुआ। करम्भक (सं० ली.) करम्भ खाथै कन्। १ दधिमि- ३ निष्कर, लाखिरान। श्रित सक्नु, दहीदार सत्तू। इसका अपर नाम कर्क- करमुखा, करमा देखी। सार "निरचलिमिः प्रादान दिजन्मभ्यः करम्भवम् ।" (राजन करमूल (सं. ली.) मणिबन्ध, कलायो। wrt) २.खेतकिणिही, एक दरख्त । ३.अविरक्ष करमूली (हि. स्त्री० ) वृक्ष विशेष, एक पेड़। यह विष्ट यव, दरा हुवा दाना। एक पावत्य वृक्ष है। कुमायू और गढ़वालमें से | करम्भा (सं० स्त्री.) केन जलेन वायुना रभ्यते सिध्यते अधिक देखते हैं। काठ कठोर तथा राम धूसरवर्ण विकीर्यते वा,क-रम-घटाए। १ शतावरी । २ प्रियङ्ग होता है, यह ग्रह एवं अषियन्त्र निर्माणमें लगती है। इन। ३ इन्दीवरा। ४ कलिङ्ग देशीय खनामख्यात करमूलीके छोटे छोटे पात्र मी बनते है। एक रमणी! पुरवंशीय अक्रोधन नृपतिने इनसे विवाह करमेस (हिं. पु.) काष्ठखण्ड विशेष, अमेर, कुल. किया था। करम्भाके ही गर्भ में देवातिथिका जन्म बांसी। यह करगहमें जपर बंधता है। करमसकी हुवा। (भारत, आदि ९५२२) नचनियाँ पैरसे दबाने पर सूत चढ़ता उतरता है। करम्भाद (वैत्रिः) करम्भ भक्षण करनेवाले। यह करमैती करमा बाई देखो। पूषाका एक उपाधि है। करमोद (हिं. पु.) धान्य विशेष, एक धान । यह करम्भि (सं० पु०.) यदुवंशीय एक राजा। इनके पिताका नाम शकुनि और पुत्र का नाम देवरात-था। Vol. IV, पिता। '. मार्गशीष मासमें कटता है। 23