पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 4.djvu/१८१

यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

१८२ कलकत्ता . 1 व्याघ्र भी थे। वह स्थान भी बहत युद्धके उपयोगी न ठहरा। इससे फिर जब चारनक उलवेड़ियामें डक बनाने लगे। वह सदल सुतानुटी . छोड़ गङ्गानदीके मुहानेको | पीड़ित सिपाहियों और अगरेजों को उन्होंने सूनानुटी हिजली की ओर चल पड़े। राहमें उन्होंने गङ्गाके पश्चिम भेन दिया। वह जाकर कोठीमें रहे थे। उसो समय कूल पर सुतानुटोसे ५ कोस दक्षिण 'टाना' नामक मलवरमें अगरेजों और मुगलोका युद्ध हुवा। सुतरां स्थानका दुग अधिकार किया। फिर वह जितने हो थायस्ताखान्के मनमें फिर प्रङ्गारेजीको सतानेको बात दक्षिणको आगे बढ़े, उतने ही नदीतीरस्य मुसलमानी उठी। उन्होंने आदेश दिया था,-'सब प्रकारेज, सूता- लवण और शस्यके गोले लूटने लगे। नदीके गर्भमें नुटोसे हुगली चले जायें। उनके गड़बड़से बाज़ार · मुसलमानों को जो नावे देख पड़ौं, वह भी पकड़ | बिगड़ गया है। इसके लिये यथेष्ट रुपया देना पड़ेगा। जहाजोंके साथ बालेश्वर भेजी गयौं। फिर देशीय सिपाही अङ्गारेजोंका,यथा सर्वस्व लूट सकते हैं। चार- बणिकों को ४० नावें उन्होंने आग लगाकर जला डाली। नकको अवस्था अच्छी न थी। उन्हें युद्ध चलाने या उस समय हिजली एक दीपकी भांति थी। पश्चिम रुपया पहुंचाने में असुविधा लगी। इससे उनके पाद- 'दिक् एक.क्षुद्र खाड़ी थी। सुतरां हिजलो पहुंचनेके शानुसार कोठीवाले दो अङ्करेज नवाबको रिझा लिये नौकाको छोड़ दूसरी कोई राह न रही। फिर बुझा उक्त अत्याचार निवारणके लिये ढाके पहुंच गये। हिजली में कोई रहता भी न था। चारो पोर वनमें फिर निकोलसनको प्रकृतकार्यतासे बिगड़. इङ्ग प्रक्वत पक्ष में नवाबका अत्याचार लेण्डके डिरेकरोने कपतान हिदको ६४ तोपों और रोकनेको हो अगरेजोंने उक्त स्थान मनोनीत किया। १६० अङ्गरेज सिपाहियों के साथ बङ्गाल भेजा। उन्हें जब-चारनकने हिजलीमें सदल उतर वन कटाया प्रादेश था-उपयुता नियमसे युद्ध कर अहारेजीका और चारों ओर तोपोंका मुरचा लगाया था। वाणिज्य बङ्गालमें चलावो, अथवा सब अलरेज सब जहान गङ्गाके ऊपर छोड़ मुहानेको रोक बैठे। सिपाहियों और कोठीवालों को मन्द्राज पचा चट- किन्तु इसका फल उलटा हुवा। हिजलो में एक विन्दु | गांव पर पाक्रमण लगावो । भी पानोपयोगी परिष्कार जल मिलता न था। दूसरे १६८६ ई०के प्रलोबर मास हिद सूतान्टी भाये। दक्षिण पवनसे समस्त अङ्गारेज सैन्य पीड़ित हुवा और घर चारनकने दो कोठीवाल अङ्गारेजोको नवाबके जलाभावसे अधिकांश मृत्यु के मुख पड़ा। जो लोग निकट ढाके भेज कह दिया था,-यदि नवाब कुछ बात बचे, वह पौड़ासे ऐसे डरे कि जीवनको आश छोड़ | सुनें, तो आप उनसे सूतानुटी और निकटवर्ती भूमि चले। शभं अदृष्टके क्रमसे नवाब शायस्ता-खान्ने उसी | खरीद आवासादि बनानको अनुमति ग्रहण करें। समय सन्धिका प्रस्ताव उठाया। चारनकने दृष्टमन हिदने यहां नवाबके अत्याचारकी कथा सुनो। सन्धि जोड़ी थी। सन्धिसे अगरेजोंको सब कोठिया वह उपतखभाव थे। उन्होंने उसी क्षण चारनकका वापस मिलौं। समुद्रसे.४० कोस उत्तर गङ्गाके पश्चिम मत न मिलते भी स्थिर रूपसे लड़नेको प्रतिमा ..कूल 'सलबेड़िया में डक और गोला बनानेको अनुमति को। हिद: सब कोठीवालों और लोगों को साथ ले हुयी थी। अङ्गारेजोका वाणिज्य विना शल्क चलने बालेखरकी पोर चल दिये। बालेखरके शासनकर्ताने लगा। केवल मुसलमानोंकी छीनी नौकायें लौटाना सन्धि करना चाहा। किन्तु उन्होंने किसी बात पर पड़ौं। नवाबके हठात् सन्धि करने का कारण था। कर्णपात न किया। शासनकर्ताने बासेखरको कोठीके हुगलीमें जहाज़ी बेड़ा लेकर जानेवाले पाडमिरल दो अरेजोंको जमानतके लिये बन्दी किया था। निकोलसनकोः इङ्गलेण्डसे . मुसलमानोंको समस्त उस समय नवाबके निकट: ढाके दो पहले भेजे नौकायें अधिकार करनेका पादेश मिला था। नवाबने | जानवानी, दूसरो कोठियोंके दो कोठीवासी. और बाद यह संवाद सुन शोघ सन्धि ठहराची........ "म्बरके उस दो बन्दियोंको शेड़ बाकी सब प्रकरण 1