पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४६३

यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

बुर्द-बुर्हानपुर बीचमें बैठने आदिके लिये थोड़ी सी जगह होती है।। के अन्यान्य मुसलमान राजाओं द्वारा यह नगर बार बार प्राचीनकालमें प्रायः इस पर रख कर तोपें चलाई जाती, आक्रमण और लूटे जाने पर भी फरुग्वि-वंशके ११३ थीं। २ गुवद । ३ गुब्बारा। ४ राशिचक्र । ५ मीनार गजाने यहां राज्य किया था। १६०० ईमें सम्राट का ऊपरी भाग अथवा उसके आकारका इमारत या कोई अकबरशाहने इसे अपने शासनभुक्त कर लिया। अंग। बादशाह किलेके दो शिम्बरको छोड कर प्राचीन बुर्द ( फा० स्त्रो०) १ ऊपरी लाभ. ऊपरी आमदनी। २ फरुखि राजाओंकी और कोई कीर्ति नहीं देग्वी जाती। शत, बाजी। ३ शतरंजके खेलकी वह अवस्था जब सव . उन वंशके बारहवें गजा अली खाँ यहां पर जुमा मस- मोहरे मर जाते हैं और केवल बादशाह रह जाता है। जिद् आदि अनेक सुन्दर अट्टालिका बना गये हैं। अक- उस समय बाजी वर्द' कहलाती और आधी मात समझी वर और उनके वंशधरोंके उद्यमग्ने यह नगर मौधमालामे जाती है। भूषित हो गया था। १६३५ ई० तक दिल्लीके अधीनस्थ बुर्दू मध्यभारतके ग्वालियर राज्यके अन्तर्गत एक गज पुरुषगण यहां रह कर राजकार्य चलाते थे । पीछे नगर। वहांसे औरङ्गाबादमें राजधानी उठा कर लाई गई थी। बुरों ( हिं० स्त्री० ) बीज बोनेका एक ढंग। इममें बीज । उसके बादसे बुहानपुर ग्वानदेश सूबाके प्रधान नगररूप. हलको जोतमें डाल दिये जाते है और उममेंमें आपे में परिणत हुआ। आप गिरते चलते हैं। १६१४ ई०में अगरेजी दृत सर टामस रो बुर्हानपुर बुर्श ( अं० पु० ) बुझा दग्यो । . आ कर यहांकी अवस्था वर्णन कर गये हैं। उसके ४४ बुर्हान निजामशाह स्य निजामशाही वंशके म गजा। वर्ष बाद टावनियरने इस नगरकी विशेष समृद्धिको इन्होंने १५६० से १५६४ ई. तक राज्य किया। ये वुहाना कथाका उल्लेग्य किया है । मुगल प्रभावके समय इस वाद नामक एक नगर बमा गये है। , नगरसे नाना द्रव्योंकी रफतनी पारस्य, तुमक, मास्को- निजामशाही देखा । । भियो, पोलगड, अरब और इजिप्त आदि प्रदेशों में बुर्हान इमादशाह - इमादशाही वंशके १ थ गजा। इन्होंने होती थी। १५६० से १५६४ ई० तक राज्य किया। ये नफजुल खाँसे सम्राट औरङ्गजेबके राजत्वकालमें बुहानपुर दाक्षि: पराजित और वन्दी हुए थे। उनको गज्यच्युतिके बाद णात्ययुद्धका केन्द्रस्थल बन गया था। १६८५ ई०में तफजुलने कुछ दिनों तक राज्यशासन किया था। औरङ्गजेबके दलबल समेत वुहानपुरका परित्याग करनेके बुर्हानपुर ---१ मध्यप्रदेशके निमार जिलेकी एक तहसील । : बाद ही मराठोंने इस नगरको लूटा । उसके ३४ वर्ष यह अक्षा० २१५ से २१३७ उ० तथा देशा० ७५.५७ वाद मराठा लोग लगातार युद्धके बाद यहांसे चौथ संग्रह से ७६ ४८ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ११३८ करनेमें समर्थ हुये थे। १७२० ई०में आसफजाह निजाम वर्गमील और जनसंख्या ८० हजारसे ऊपर है। इसमें उलमुल्कने दाक्षिणात्यको फतह कर इस नगरमें गज बुर्हानपुर नामका १ शहर और १६४ ग्राम यगते है। पाट स्थापन किया। १७४८ ईमें यहीं पर उनकी असोरगढ़ नामका यहां एक प्राचीन किला भी है। मृत्यु हुई। २ उक्त तहसीलका एक शहर । यह अक्षा० २१.१८ १७३१ ई०में नगरके चारों और प्राचीर और बुज उ० तथा देशा० ७६ १४ पू० के मध्य अवस्थित है। : तथा : सिंहद्वार स्थापित हुए. १७६० ईमें उदयगिरि जनसंख्या ३३३४१के लगभग है। हिन्दूकी संख्या सबसे युद्धके बाद निजामने धुर्हानपुरराज्य पेशवाके हाथ ज्यादा है। १४०० ई०में खानदेशक फरूखिवंशीय राजा सौंपा । इसके १८ वर्ष पीछे मिन्दियाराजको उक्त नसिर खाँने इस नगरको दौलताबादके विख्यात मुसल सम्पत्ति हाथ लगी। १८०३ ई०में सेनापति चेलेली- मान शेख बुर्हानउद्दीनके नाम पर बसाया। दाक्षिणात्य ने नगर पर अधिकार जमाया। किन्तु १८६० ई०से ही Vol, ..V. 115