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हिन्दी भाषा की उत्पत्ति।

जंगली आदमियों को जानसन की अँगरेज़ी यदि सुनाई जाय तो मालूम हो। बड़े बड़े वाक्य आप देखिए––में, ने, से; का, की, के; चला, मिला, हिला आदि––के सिवा आप को एक भी हिन्दुस्तानी शब्द उनमें न मिलेगा। व्याकरण भर हिन्दुस्तानी, बाक़ी सब फ़ारसी, अ़रबी शब्द। हमारी भाषा को शुरू-शुरू में हिन्दुओं ने भी खूब बिगाड़ा है। फ़ारसी पढ़ पढ़ कर वे मुसल्मानी राज्य में मुलाज़िम हुए और फ़ारसी, अ़रबी के शब्दों की भरमार करके अपनी भाषा का रूप बदला। मुसल्मान तो बहुत समय तक अपना सारा काम फ़ारसी ही में करते थे। पर हिन्दुओं ने शुरू ही से ऐसी भाषा का प्रचार किया। अब तो मुसल्मान और फ़ारसीदाँ हिन्दू, दोनों ऊँचे दरजे की उर्दू लिख लिखकर इन प्रान्तों की भाषा पर एक अत्याचार कर रहे हैं।

हिन्दी

"हिन्दी" शब्द कई अर्थों का बोधक है। अँगरेज़ लोग इसके दो अर्थ लगाते हैं। कभी कभी तो वे इसे उस भाषा का बोधक समझते हैं जिसे हम, हिन्दी लिखनेवाले, इन प्रान्तों के लोग, हिन्दी कहते हैं––अर्थात् वह भाषा जो "हिन्दुस्तानी" की शाखा है और जो देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। कभी कभी इसे उस भाषा या बोली के अर्थ में प्रयोग करते हैं जो बंगाल और पंजाब के बीच के देहात मेँ बोली जाती है। पर कोई कोई मुसल्मान इसे फ़ारसी का शब्द मानते हैं और "हिन्द के निवासी" के अर्थ में बोलते हैं। हिन्द (हिन्दुस्तान)