पृष्ठ:हिंदी शब्दसागर भाग 8.djvu/१८१

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का नाम। मुड'-० 1 ६६४० मुंडवेदांग वीडो के कारण नेत्रपटल पर होता है। जब यह बढ़ जाता है, मुर का वध करने के कारण ही भगवती का नाम चामुंडा तव 'मु जजालक' कहलाता है। पहा था। मुंजकेतु-सञ्ज्ञा पुं॰ [ सं० मुञ्जकेतु ] महाभारत के अनुसार एक रागा ४. गह गह। ५ मुटन पगपात, रज्जाम । ६. वृक्ष का एं। ७ कटा हुमा तिर | ८ पोत नामा गम द्रव । ६ एफ उप- मुजकेश-सञ्ज्ञा पुं॰ [ म० मुञ्जकेश] १ गिव । २ विणु। ३ निषद् TI TIम । १०. गुति मिन (२०)। १. गर प्रार महाभारत के अनुसार एक राजा का नाम । का लोः । मयूर । १२ गापा मूर या मल । मुजकेशी-सञ्ज्ञा पु० [ स० मुञ्जकेशिन् ] विगु । मुंगा। मुसाविता पाना । २ अथम । नीन । मुजग्राम-सझा पुं० [सं० मुञ्जग्राम ] महाभारत के अनुमार एक मुडक-मरा ० [ H० मुरटक ] ? मतरु। निर । २. गूडनेवाला, प्राचीन नगर का नाम । हज्जाम । ३. अनिषद् का नाम । मुजजालक-सज्ञा पु० [ स० मुजजालक ] घोटो की आँस के मुजक मु डकर - राना ' [हिं० मुट+फर, १० पोल टैक्स ] प्रत्येक रोग का उस समय का नाम जब वह बहुत बढ जाता है । नागरिका पर उगाया या कर। उ०—कान मान्त गवर्नर मुजपृष्ठ-सञ्ज्ञा पुं० [ स० मुञ्जपृष्ट ] महाभारत के अनुसार एक का काम ये उपनिवश चिर पा तr मिला। जिनम उन्ह प्राचीन प्रदेश का नाम जो हिमालय पर्वत मे था। हिदायत की गई है कि नया राम मिल्ने ता प्रजापित गुडकर मुजमणि-सज्ञा स्त्री॰ [ स० मुञ्जमणि ] पुष्पराग मगि । पुसराज | का लगाना रोक रगे।-माज (१।१।३६), पृ. ४ । मुजमेखला-सशा स्त्री० [ म० मुञ्जमेखला ] {ज की बनी हुई वह मुडकरी। 1-शा न[ +करी (प्रत्य॰)] २० 'मुंटकरी' । मेखला जो यज्ञोपवीत के समय पहनी जाती है। मु डकिट्ट-सा पुं० [२० मुण्डफिट ] महूर । मुंजमेखली-सशा पु० [ स० मुञ्जमेखलिन् ] १ विग्रणु । २ गिय । मुडचणक-मरा पुं० [म० मुरचाणक] १. गना । २. काय (ले०) । मुजर- सज्ञा पुं॰ [ सं० मुजर ] १ कमल की जट । २ फमन को मुडधान्य-सदा पुं० [H० मुखधान्य] नुव त के अनुसार एक प्रकार नाल । मृणाल । का शानिधान्य जा मुउशानि भी पहनाता है। वारा धान । मुजली-वि० [हिं० मु ज+ली (प्रत्य॰)] मुंज मवधी । मज को। मु डन-सशा पुं० [ म० मुरडम ] १, मिर को उत्तरे से गूंजन की मुजवट-सञ्ज्ञा पु० [सं० मुञ्जक्ट ] महाभारत के अनुसार एक मिया । २, द्विजातिया । १६ गम्भारो मे से एप जो बाल्यावस्था प्राचीन तीर्थ का नाम । मे यज्ञोपवीत ने पहने होता है जिमम बाला का निर टा मुजवान्-सज्ञा पु० [ स० मुजवत् ] १ नुश्रु त के अनुसार एक जाता है। प्रकार की सोमलता । २ महाभारत के अनुसार कलाश पर्वत मुडनक-नरा पु० [ म० मुल्दनक ] १. मुशालि नामक धान्य । के पास के एक पर्वत का नाम । वारी घान | २.वट पा वृक्षा। मुजाट, मुजाटक-पुं० [ म० मुजाट मुञ्जटक ] एफ पीने का मु डनिका-मानी[ स० मुण्डनिका ] मु उशालि । वोरो पान । नाम (को०] । मु उपृष्ठ-मसा पुं० [ म० मुरहट ] एक प्राचीन जापद का नाम । मुंजातक-सञ्ज्ञा पु० [सं० मुजातफ ] १ ज । २ गुजरा याद । मु डफल-सा पुं० [ ० मुरुडराज ] नारियल । मुजाद्रि-सज्ञा पुं॰ [सं० मुजाद्रि ] पुराणानुसार एक पर्वत मु डमडली-सा पो [ म० मुरउमण्डली ] अशिक्षिन सेना। विना का नाम । मीसी हुई फोज। मुजानी-सञ्ज्ञा स्त्री॰ [सं० गल्था प्रदेश ( कवोज ) की एक भाषा । मुडमाल-सरा पु० [ 10 मुरहमाल ] द० 'गु डमाला'। का नाम। मुडमाला-सा सो. [ म० मुण्डमाला ] १. पटे हुए तिरो या मुंजारन-सझा पुं० [ स० मुजारण्य ] मूज वन । उ० - अब सुनि खापडिगो की माला गो शव या काली देवी के गले मे होती उनइसवौं अध्याइ । स्याम राम मुजारन जाई।-नद० ग्र०, है । २. वगाल की एक नदी का नाम । पृ० २८६ । मुडमाली-राश सी॰ [ म° ] गले में खोपडियो की माला पहनन- मुजारा-सञ्ज्ञा स्त्री॰ [स० मुजारा] एक प्रकार का कद । मुजरा कद । वाली, काली। मुठि@-सञ्ज्ञा स्त्री० [सं० मुष्टि, प्रा० मुठ्ठि] १ मुष्टि । मुठ्ठी। मूठी । मुडमालिनी-सग पुं० [सं० मुण्डमालिन् ] मुड को माला धारण उ.-मुछुट्टिय घाव कर दिठ मुठि। -पृ. रा०, ६११६३६ । करनेवाले, शिव। मुड'-सञ्ज्ञा पुं० [ स० मुण्ड ] १ गरदन के ऊपर का अग जिसमे मुडली-सश सी० [ सं० मुण्ट (साफ करना)+हिं० ली (प्रत्य॰)] केश, मस्तक, आँख, मुह आदि होते हैं। सिर । २ पुराणानुसार दे० 'मु डो"। काटना। उ०-अधली आखिन काजल किया, राजा बलि के सेनापति एक दैत्य का नाम । ३ शुभ के सेनापति मुडली माग सवारी।-मुदर० प्र०, भा॰ २, पृ० ८७३ । एक दैत्य का नाम । मु डलोह-सचा पु० [ सं० मुण्ढलोह । मङ्कर । विशेप-यह शुभ की प्राज्ञा से भगवती के साथ लडा था पोर मुडवेदाग-सहा पुं० [ म० मुण्डवेदाम ] महाभारत के अनुसार एक उन्हीं के हाथो मारा गया था। इसका भाई चद था। चड मौर नागासुर का नाम।