पृष्ठ:हिंदी शब्दसागर भाग 6.djvu/३९८

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पैमाल पैतृक पैतृक'-वि० [सं०] १ पितृ संवषी। २ पुएवेनी । पुरखों का। हो । उपज । फसल । जैसे,—इस खेत की पैदावार अच्छी जैसे, पैतृक भूमि, पैतृक संपत्ति । नही है। पैतृक'-मञ्ज्ञा पुं० पितरों के लिये किया जानेवाला एक श्राद्ध [को०)। पैदावारी-सशा सी० [ फा० पैदावार ] 'पैदावार' । पैतृमत्य-सज्ञा पु० [सं०] १ अविवाहित स्त्री का पुत्र । २ महान पैदाश-सञ्ज्ञा स्त्री० [फा० पैदाइश ] दे० 'पैदाइश' । उ०-कहता व्यक्ति का पुत्र (को॰] । हूँ मैं मरिमम का पैदाश प्रवल । करूं जिक्र ईसा का पीछे पैतृष्वसेय, पैतृष्वसीय -सञ्ज्ञा पुं० [सं०] फुफेरा भाई [को०] । नकल । -दक्खिनी०, पृ० ३५० । पैत्त-वि० [सं०] पिचज । पित्त से उत्पन्न । पैधा-सज्ञा पुं० [हिं० ] १० 'पापा' । उ०-गुरमुखि पैघा शब्द हजूरा।-प्राण, पृ० १६७ ॥ पैचल-वि० [सं०] पीतल का बना हुमा [को०] । पैत्तिक-वि० [स०] पित्त सबंधी । पित्त का । पित्त से उत्पन्न । पैन'-~-सज्ञा पुं० [ म० प्रयाण, हिं० पयान] १ नाली। २ पनाला। पैत्र-सञ्ज्ञा पुं० [सं०] १. मेंगूठे और तर्जनी के बीच का भाग । पैन-वि० [सं० पेण ( = घिसना), हिं० पैना] दे० पैना' । उ०- मोसो क्यो न कहै इहा मैन हनै सर पैन । राजिव नैन बसे पितृतीर्थ । २ पितृ सवधी श्राद्ध पादि। ३ पितरों के लिये पवित्र दिन, मास या वर्ष (को॰) । कहा नहिं पाए रग एन ।-स० सप्तक, पृ० २३५ । पैत्र-वि०१. पितरो से सबधित (श्राद्ध प्रादि )। पैनणा-सनः पुं० [हिं० पहनना ] दे॰ 'पहनना' । उ०-खाणा पैत्र्य-वि० [सं०] पितृ सवधी । पीणा पैनणा मन की खुशी खुपारु -प्राण०, पृ० २८५ । पैथला-वि० [हिं० पाय + थक्ष ] उथला । छिछला । पायाब । पैना'-वि० [सं० पैण ( = घिसना, टेना) ] [ वि० सी० पैनी ] पैद-क्रि० वि० [हिं० पैदल ] दे० 'पैदल'। उ०-दोय लक्ख जिसकी धार बहुत पतली या काटनेवाली हो। चोखा । पैद चहुँ गढन कौद ।-ह. रासो, पृ० ६० । धारदार । तीक्ष्ण । सेज । उ०-परनारी, पनी छुगे कबहु न लावो घंग ( शब्द०)। पैदरी-सज्ञा पुं० [हिं० ] दे० 'पैदल' । उ०--विस सहस पैदर तुम लिप्पहु । गौरज गंमन मम रज २८पहु । -प० रासो०, पैना२-सञ्ज्ञा पुं० १ हलवाहो की बैल हाँकने की छोटी छड़ी। २ पृ० १३७। लोहे का नुकीला छड । अकुश । पैदल'-वि० [सं० पादतल, प्रा. पायतल ] जो पांव पांव चले । पैना-सञ्ज्ञा पुं॰ [? ] धातु गलाने का मसाला । जो सवारी प्रादि पर न हो। पैरो से चलनेवाला । जैसे, पैना-सञ्ज्ञा पुं॰ [हिं० ] दे० पैन"। पैदल सिपाही, पैदल सेना । पैनाईg-राधा सी० [हिं० पैना+ ई ( प्रत्य० ) पैनापन । उ० पैदल-क्रि० वि० पावे पावें। पैरों से । सवारी आदि पर नहीं। खोडे चाहि पनि पैनाई। बार चाहि पातरि पतराई जैसे, पैदल चलना, पैदल घूमना । जायसी ग्रं० (गुप्त), पृ० २२६ । पैदल-तशा पुं०१ पावं पाव चलना। पादचारण। जैसे, पैदल पैनाक-वि० [ स० ] पिनाक सवधी । का रास्ता, पैदल का सफर । २ पैदल सिपाही । पा पार्व पैनाना-क्रि० स० [हिं० पैना ] छुरे प्रादि की धार को 4- चलनेवाला योद्धा । पदाति । जैसे,—उसके साथ ५ हजार कर पैनी करना । चोखा । करना । टेना । सवार और बीस हजार पैदल थे। ३ शतरज मे वह नीचे दरजे की गोटी जो सीधा चलती और आठ मारती है। पैनाना@:-क्रि० स० [हिं० ] दे० 'पहनाना' । उ०-सिरि घु पैषा प्रभि पनाया।-प्राण, पृ० ११२ । पैदा -वि॰ [फा०] १ उत्पन्न । जन्मा हुआ । प्रसूत । जो पहले न रहा हो, नया प्रकट हुमा हो । जैसे, लहका पैदा होना, अनाज पैन्य-सञ्ज्ञा पुं० [स०] १ पीनता। मोटापा । २ घनापन (को०] पैदा होना । २ प्रकट । प्राविर्भूत । घटित । उपस्थित । पैन्हनाई-क्रि० स० [हिं० ] दे० 'पहनना' । जैसे, झगडा पैदा होना। ३ प्राप्त । अजित । हासिल । कमाया पैप्पल-वि० [स०] पीपल की लकडी का बना हुघा को०] । हुप्रा । जैसे, रुपया पैदा करना, कमाल पैदा करना । पैप्पलाद-सशा पुं० [स०] अथर्ववेद की एक धारा [को०] । क्रि० प्र०—करना । होना। पैसक-सञ्ज्ञा स्त्री॰ [?] कलावचू की बनी हुई एक प्रकार की नह पैदा-सशा स्त्री० प्राय । आमदनी । अर्थागम। लाम । जैसे,—उस गोट जिसे अंगरखे, टोपी प्रादि के किनारे पर लगाते हैं। ले नौकरी मे बडी पैदा है। पैमाइश-सशा स्त्री॰ [फा०] मापने की क्रिया या भाव । पैदाइश-सच्चा स्त्री॰ [ फ़ा० ] उत्पत्ति । जन्म । जैसे, जमीन या खेत की पैमाइश । पैदाइशी-वि० [फा० ] १ जन्म का । जब से जन्म हुमा तभी पैमाना-सञ्ज्ञा पुं॰ [ फा०] वह वस्तु (छह, डडा, सूत, का। बहुत पुराना । जैसे, पैदाइशी रोग।२ स्वाभाविक बरतन मादि) जिससे कोई वस्तु मापी जाय । मापने प्राकृतिक । जैसे,—यह हुनर पैदाइशी होता है। मौजार । मानदड । पैदावार-शा सी० [फा० ] अन्न आदि जो खेत मे बोने से प्राप्त पैमानg -वि॰ [फा० पामाल ] दे॰ 'पामाल' । उ०-काम .4 1