पृष्ठ:हिंदी शब्दसागर भाग 10.djvu/४२०

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७०४० सूक्ष्मत्व सूधर्मशालि सूक्ष्मत्व-सज्ञा पुं० [स०] दे० 'सूक्ष्मता' । सूक्ष्मपुप्पी 1-शा मी० [सं०] १ शखिनी । २ यवनिक्ता नाम की लता। सूक्ष्मदर्शक यत्र-सज्ञा पु० [स० सूक्ष्मदर्शक + यन्व] एक यत्र जिसके सूक्ष्मफल सज्ञा पुं० [म०] १ लिमोडा । २ मूकदार । मूक्ष्म बदर । द्वारा देखने पर सूक्ष्म पदार्थ वडे दिखाई देते है। अणुवीक्षण सूक्ष्मफना मज्ञा श्री० [स०] १ मुई आँवला। मूम्यामलको। २ यत्न । खुर्दवीन । तालीसपत्न । ३ मालकगनी। महाज्योतिप्मती लता। सूक्ष्मदर्शिता--सज्ञा स्त्री॰ [स०] सूक्ष्मदर्शी होने का भाव । सूक्ष्म या सूक्ष्मवदर-संज्ञा पुं० [स०] लघुबदर । झरवेर [को०] । बारीक वात सोचने समझने का गण। सूक्ष्मवदरी-सज्ञा मी० [सं०] झरबेर । भूमदगे। सूक्ष्मदर्शी-वि० [स० सूक्ष्मदशिन्] १ सूक्ष्म विषय को समझनेवाला । सूक्ष्मवीज--सया पु० [म०] पोस्नदाना । समग्रम । वारीक बात को सोचने समझनेवाला । कुशाग्रबुद्धि। सूक्ष्मबुद्धि'--वि० [सं०] मूक्ष्म या तनम्पर्णी बुद्धिवाला [को०)। २ अत्यत बुद्धिमान् । ३ तीव्र या तीखी दृष्टिवाला (को०) । सूक्ष्मबुद्धि'--मरा स्त्री० दे० 'सूक्ष्ममति' [को०] । सूक्ष्मदल-सज्ञा पु० [स०] एक प्रकार की सरसो । देवमपंप । सूक्ष्मदला-सञ्ज्ञा स्त्री० [स०] धमासा । दुगलभा। सूक्ष्मभूत-सरा पुं० [सं०] अाकाशादि शुद्ध भूत जिनका पचीकरण न हुया हो। सूक्ष्मदारु -सज्ञा पुं० [स०] काठ की पतली पटरी या तख्ता । विशेप-साक्ष्य के अनुसार पचतन्मान अर्थात् शब्द, स्पर्श,म्प, सूक्ष्मदृष्टि'-सज्ञा स्त्री॰ [स०] वह दृष्टि जिससे बहुत ही सूक्ष्म वाते भी रम और गध तन्मान , ये अलग अलग सूक्ष्म भूत हैं। इन्हीं पच- दिखाई दें या समझ मे आ जायें । तन्मात्न से पचमहाभूतो की उत्पत्ति हुई है। पचीकृत होने पर सूक्ष्मदृष्टि-एशा पु० वह व्यक्ति जो सूक्ष्म से सूक्ष्म बाते गा देग या आकाशादि भूत स्थूलभूत कहनाते है । विशेष दे० 'तन्मात्र' । समझ लेता है। मूक्ष्ममक्षिक--संज्ञा पुं० [म०] [स्त्री॰ सूक्ष्ममशिका] मच्छड । मशक । सूक्ष्मदेह -सञ्ज्ञा स्त्री० [स०] लिंग शरीर । सूक्ष्म शरीर (को०] । सूक्ष्मदेही-सज्ञा पुं० [स० सूक्ष्मदेहिन्] परमाणु जो विना अणुवीक्षण सूक्ष्ममति-वि० [सं०] तीक्ष्णबुद्धि । जिसकी बुद्धि तेज हो । के दिखाई नहीं पड़ता। सूक्ष्ममान--संशा पुं० [सं०] १ ठीक ठीक तौल या नाप । स्यूलमान सूक्ष्मदेही-वि० सूक्ष्म शरीरवाला । जिसका शरीर बहुत ही मूक्ष्म या का उलटा। २ वह मान जिममे सूक्ष्म अतर भी ज्ञात हो सके [को०] । छोटा हो। सूक्ष्मनाभ-सञ्ज्ञा पु० [स०] विष्णु का एक नाम । मूक्ष्ममूला-सा सी० [सं०] १ जयती । जियती । २ ब्राह्मी। सूक्ष्मपत्र-सञ्ज्ञा पु० [स०] १ धनिया। धन्याक । २ काली जीरी। सूक्ष्मलोभक-सज्ञा पुं॰ [स०] जैन मतानुसार मुक्ति की चौदह अब- वनजीरक । ३ देवसर्पप । ४ छोटा वैर। लघु बदरी। स्थानों में से दमवी अवस्था। ५ माचीपत्र । सुरपर्ण। ६ जगलो वर्वरी । वन वर्वरी। सूक्ष्मवल्ली--सरा रसी० [सं०] १ ताम्रवल्ली। २ जतुका नाम की ७ लाल ऊख । लोहितेषु। ८ कुकरीदा । कुकुदर । ६ कोकर। लता । ३ करेली। लघु कारवेल्ल । बबूल । १०.धमासा। मुरालभा। ११ उडद । माप। १२ सूक्ष्मशरीर-सा पु० [सं०] पाँच प्राण, पाच ज्ञानेद्रियां, पांच सूक्ष्म- अर्कपन। भूत, मन और बुद्धि इन सत्रह तत्वो का समूह । मूक्ष्मपत्रक--सञ्ज्ञा पुं० [स०] १ पित्तपापडा। पर्पटक । वनतुलसी। विशेष--साक्ष्य के अनुमार शरीर दो प्रकार का होता है-स्थूल बनवर्वरी। शरीर और सूक्ष्म शरीर। हाथ, पैर, मह, पेट ग्रादि अगो से सूक्ष्मपत्रा-सञ्ज्ञा स्त्री० [सं०] १ वनजामुन । २ शतमली। ६ युक्त शरीर स्थूल शरीर कहलाता है । परतु इस स्थूल शरीर के वृहती। ४ धमासा । ५ अपराजिता या कोयल नाम की राता। नष्ट हो जाने पर इसी प्रकार का एक और शरीर वच रहता ६ लाल अपराजिता। ७ जीरे का पौधा। ८ वला। है। जो उक्त सत्रह अगो और तत्वो का बना हुआ होता है। सूक्ष्मपत्रिका--सज्ञा स्त्री० [स०] १ सौफ। शतपुप्पा। २ गतावर । इसी को सूक्ष्म शरीर कहते हैं। यह भी माना जाता है कि जब शतावरी। ३ लघु ब्राह्मी। ४ पोई। क्षुद्रपोदकी। ५ ता मुक्ति नहीं होती, तब तक इस सूक्ष्म शरीर का आवागमन धमासा । मुरालभा (को०)। ६ आकाशमासी (को॰) । वरावर होता रहता है। स्वर्ग और नरक आदि का भोग मी इसी सूक्ष्म शरीर को करना पड़ता है। सूक्ष्मपत्री-सज्ञा स्त्री॰ [स०] १ अाकाशमासो । २ मतावर । शतावरी। सूक्ष्म शर्करा--सशा स्त्री॰ [स०] बालू । वालुका । सूक्ष्मपर्णा-सज्ञा स्त्री० स०] १ विधारा । वृद्धदारु । २ छोटी शरण- पुष्पी। छोटी सनई। ३ वनभटा। बृहती। सूक्ष्मशाक-सज्ञा पुं० [सं०] एक प्रकार की वबुरी जिसे जलबबुरी भी कहते हैं। सूक्ष्मपर्णी-सज्ञा स्त्री० [म०] रामतुलसी । रामदूती। सूक्ष्मशालि-सज्ञा पुं० [स०] एक प्रकार का महीन सुगधित चावल सूक्ष्मपाद-वि० [सं०] छोटे पैरोवाला। जिसके पैर छोटे हो । जिमे सोरो कहते है। सूक्ष्मपिप्पली-सज्ञा स्त्री० [स०] जगली पीपल । बनपिप्पली। विशेप-वैद्यक के अनुसार यह मधुर, लघु तथा पित्त, अर्श और सूक्ष्मपुष्पा--सज्ञा स्त्री॰ [स०] सनई । शणपुप्पी । दाहनाशक है।