पृष्ठ:हिंदी विश्वकोष भाग ३.djvu/४८१

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एकोत्तरिका-एक्को एकोत्तरिका (सस्त्री.) बौहोंका चतुर्थ भागम। युत्र उभय विद्यमान रहते कनिष्ठ होनेसे भ्राता एकोदक (सं० पु.) एक तुल्यमुदक' यस्य, बहुव्री०।। तथा ज्येष्ठ होनेसे भ्रातुष्य त्रको श्राद्ध करना चाहिये। एकगोत्रज ऊर्ध्वतन सप्तम पुरुष। एकोद्देश (सं० पु.) एकस्य उद्देशः, ६-तत् । एकक एकोदर (सं० पु.) एक अभिन्न उदर जन्मनक्षत्र उद्देश्य, एक ही बातको हिदायत। यस्य, बबी०। १ सहोदर, एक ही पेटसे पैदा होने- एकोन (सं० त्रि.) एककम, जिसमें एक कम पड़े। वाला। (लो०) २ तुल्य उदर, बराबर पेट। यह शब्द विशति, त्रिशत् प्रभृति दशकके आदिमें एकोदात्त (सं० त्रि.) एकमात्र उदात्त स्वरयक्त। आता है, जैसे-एकोनविंशति, एकोनत्रिशत् प्रभृति । एकोद्दिष्ट (स.ली.) एकः प्रेत एव उहिष्टो यत्र, एकोशिका ( स० स्त्री०) एका मुख्या उशिका कम- बहुव्री०। प्रेतोद्देशसे किया जानेवाला एक श्राद्ध। नोया, कर्मधा। . पाठा, हरज्योरी। यह शाद मृत व्यक्ति के उद्देशसे प्रति वर्ष किया जाता एकोष (सं० पु०) अविच्छिन्नप्रवाह, बन्द न होने है। इसे मध्याह्नकालपर करना चाहिये। क्योंकि | वाल बहाव। पूर्वाह्नको दैविक, अपराह्नको पार्वण और मध्याह्नको. एकोषिका, एकोशिका देखो। एकोद्दिष्ट याद करने की व्यवस्था है। यथा एकौघभूत (सं० त्रि.) एकमात्र समूहमें इकट्ठा __पूर्वाहे दैविक श्राद्धमपराळेतु पार्वणम् । हुश्रा, जो मिलकर ढेर बन गया हो। एकोद्दिष्टं तु मध्याह्ने प्रातई द्धिनिमित्तकम् ॥” (मनु) |एकोमा ( हिं० वि० ) एकाकी, तनहा, दूसरेको कुतपके प्रथम भाग और आवर्तनके निकटवर्ती साथ न रखनेवाला। कालपर एकोद्दिष्ट आरम्भ करना चाहिये। पश्चिम- एकौतना (हिं० क्रि०) बालका फूटना, दाना पड़ना। दिगवस्थित छाया पूर्वदिक जाते समय आवतनकाल | एका (हिं० पु.) . १ यामविशेष, एक गाड़ी। इसमें होता है। एकोद्दिष्टके समय कोई विघ्न पड़नेसे अन्य एक ही अखं वा वृषभ जीता जाता है। २ अद्वितीय मासमें कृष्ण एकादशी तिथिको शाह किया जा सकता वौर, पनोखा बहादुर। ३ बड़ा मुदगर। यह दोनों है। पिता और माताके वाहका पुत्रको ही अधिकार है। हाथसे उठता है। ४ प्राभूषणविशेष, एक जे.वर । पत्रके प्रभाव में पत्नी पौर पलीके अभाव में सहोदरपर इसमें एक ही नग लगता है। पक्के को लोग बांहपर पिण्डजलदान करनेका भार पड़ता है। पुत्र शब्दके बांधते हैं। ५ किसी किस्मका शमादान। इसमें हारा हादश प्रकार पुत्रोंके श्राचाधिकारी होनेकी एक ही बत्ती जलती है। ६ एक ताश। इसमें एक सम्भावना रहते भी कलिमें पन्य पुत्रका निषेध लगने- हो. बूटी रहती है। ७ पशविशेष, अपने झुण्डको छोड़ से औरस और दत्तक पुत्र ही समझा जायेगा। याज- अलग रहनेवाला जानवर। (त्रि.) ८ एकसम्बन्धीय, वल्काके कथनानुसार पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र, दौहित्र, पत्री, | जो दूसरेसे सरोकार रखता न हो। ८ एकाकी, भाता, चातुष्युत, पिता, माता, पुत्रवधू, भगिनी, पकेला। भागिनेय, सपिण्ड तथा नोदकमें पूर्वपूर्वका प्रभाव एक्कावान (हिं. पु.) एक्का हांकनेवाला पुरुष, जो पानेसे उत्तरोत्तर व्यक्ति श्राहका अधिकारी होगा। शख स एक्का चलाता हो। किन्तु जहां पिताके बाद पितामह मरता, उस स्खलमें एक्कावानी (हिं॰ स्त्री०) १ एका चलानेका काम। पितामहके दत्तकादि पुत्र न रहनेसे पौत्रको अधिकार | २ एक्केको मजदूरी। मिलता है। दाक्षिचात्य ग्रन्थमें लिखा, कि पत्री तथा | एक्को (हिं. स्त्री..) १ ताशका एक पत्ता। यह दौहित उभय विद्यमान रहते पत्री, दौहित्र एवं अपने रंगमें सबसे बड़ी पड़ती और हरेकको काट मातुष्युत उभय विद्यमान रहते विभनाबमें दौहित्र सकती है। २ एकमात्र वृषभविशिष्ट शंकट, एक सबा अविभनाबमें मातुष्प व और माता एवं मातु- बसको गाड़ी।