पृष्ठ:हिंदी रस गंगाधर.djvu/९

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ज्ञाता मात्र भी उसका अनुभव कर सकें। अतएव हमने अनुवाद में इस बात का ध्यान रखा है कि मूल में जहाँ नागरिका, उप- नागरिका अथवा ग्राम्य वृत्ति है वहाँ अनुवाद में भी वही वृत्ति रहे, यहाँ तक कि जहाँ एक पद्य में तीन-तीन वृत्तियाँ बदली हैं, वहाँ भी उनके निर्वाह का यथाशक्ति प्रयत्न किया जाय। इतने पर भी मतभेद हो सकता है,और ऐसा होना अनिवार्य भी है।

विषय-विवेचन

हमने एक अनधिकार चेष्टा और की है। वह है भूमिका का 'विषय-विवेचन' भाग। इसमें हमने जिन विषयों का विवेचन किया है, वे अत्यन्त गंभीर और अत्यधिक सामग्री तथा अध्ययन की अपेक्षा रखते हैं; और हमें विश्वास है कि इस विषय में हमारे जैसे अल्पज्ञ और अल्पबुद्धि प्राणी से अनेक भूलें हुई होगी। और कई बातों की कमी तो हमारे जानते में भी रह गई है, जिसे हम पूरा नहीं कर सकें। सद्भाग्य से यदि हमारे सामने इसके द्वितीय संस्करण का सुयोग आवेगा और उस समय हमारी परिस्थिति अच्छी होगी, तो हम उसे पूर्ण करने का प्रयत्न करेंगे। इतने पर भी यह समझकर कि हमारे इस विषय को छोड़ देने पर, संभव है, कोई भावी विद्वान् इसे सर्वांगपूर्ण बना सकें और इस समय भी जैसा कुछ संभव है, वह इन विषयों के अध्येताओं के उपयोगी हो, हमसे जो कुछ