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स्वाधीनता।


है । जैसे, इस समय, क्रिश्चियनों का यह विश्वास नास्तिक धर्म के विषय में है, वैसे ही, उस समय, मार्कस आरेलियस का विश्वास क्रिश्चियन धर्म के विषय में था । उसके दिल में यह बात जम गई थी कि क्रिश्चियन धर्म झूठा है इसलिए समाज को उससे जरूर हानि पहुंचेगी । इसमें कोई सन्देह नहीं। तिसपर भी, उस समय क्रिश्चियन धर्म की योग्यता के समझनेवालों में अगर कोई सबसे अधिक लायक और समझदार था तो वह मार्कस आरे- लियस ही था । परन्तु क्रिश्चियन-धर्म-सम्बन्धी बातों का प्रतिबन्ध करके उसने भी गलती की। इससे जो आदमी यह समझता हो-जिसे इस बात का घमण्ड हो-कि मैं मार्कस आरेलियस से भी अधिक बुद्धिमान् और अधिक समझदार हूं; मैं अपने समय के ज्ञानवान् और चतुर आदमियों में, उस समय के खयाल से मार्कस आरेलियस से भी अधिक प्रवीण और अधिक योग्य हूं; मैं सच बात को ढूंढ निकालने में उससे भी अधिक उत्सुक और उत्साहशील हूं; और सत्य के मिल जाने पर मैं मार्कस आरेलियस से भी अधिक निष्ठा से उसका आदर करूंगा-तो, वह, विचार या विवेचना करना, मत देना या किसी मामले में राय जाहिर करना बन्द कर देने के इरादे से लोगों को खुशी से सजा दे । परन्तु जिसे इस तरह का अभिमान न हो, अर्थात् जो अपने को सब बातों में मार्कस आरेलियस से भी अधिक न समझता हो उसे चाहिए कि वह इस खयाल से कि मैं और मेरा समाज, दोनों मिलकर, अभ्रान्तिशील हूं, मार्कस आरेलियस की तरह कभी गलती न करे ।

धर्मसम्बन्धी बातों की स्वाधीनता देना जो लोग बुरा समझते हैं, अर्थात् जो लोग इस बात के खिलाफ हैं कि जो जिस धर्म को चाहे स्वीकार कर ले, या किसी धर्म के विषय में जिसकी जो राय हो उसे वह जाहिर करे, उनसे यह पूछा जा सकता है कि धाम्मिक मतों के प्रचार को रोकने के इरादे से सजा देना तुम जिन दलीलों से मुनासिब समझते हो क्या वही दलीलें मार्कस आरेलियस की तरफ से नहीं पेश की जा सकती ? खयाल करने की बात है कि क्रिश्चियन धर्म के प्रचार को रोकने के लिए मार्कस आरेलियस को तो ये लोग दोषी ठहराते हैं; पर जिन धर्मों का मेल क्रिश्चियन धर्म से नहीं मिलता उनके प्रचार को रोकना निर्दोर समझते हैं ! इस तरह जब कोई इन लोगों की गलती इनके गले उतार देता है और खूब ही इनके