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स्वाधीनता ।

उस तरह की शिक्षा को लोग जितना अधिक प्राप्त करते हैं; पराधीनता की उतनी ही अधिक वृद्धि देश में होती है-उतना ही अधिक सब लोग गुलामी के पसे में फँसते हैं । अधिकारी लोग भी इस फाँस से नहीं बचते; उनको भी गुलाम बनना पड़ता है। क्योंकि, जिस तरह, सब साधारण आदमी अधिकारी मण्डल के दास होकर रहते हैं उसी तरह अधिकारियों को भी अपनी महकमेशाही के कायदे-कानून का दास होना पड़ता है। इस विषय में चीन का उदाहरण ध्यान में रखने लायक है। वहां के बहुत बड़े अधिकारी मन्दारिन कहलाते हैं। ये मन्दारिन और मामूली किसान, दोनों, वहां की राज्य-पद्धति के एक से गुलाम हैं। * जेसूइट लोगों ने जो पन्थ चलाया है उसे उन्होंने अपने फायदे-अपनी उन्नति के लिए चलाया है। परन्तु इस पन्थ का प्रत्येक आदमी अपने ही बनाये हुए नियमों का सब से बड़ा दास हो गया है।

फिर, इस बात को भी न भूलना चाहिए कि यदि देश भर के बुद्धिमान, चतुर और योग्य आदमी गवर्नमेंट के नौकर हो जायेंगे तो एक न एक दिन मानसिक ही नहीं, किन्तु शारीरिक उन्नति का भी हास शुरू हो जायगा। जितने गवर्नमेण्ट के नौकर होते हैं वे किसी न किसी महकमे से जरूर • सम्बन्ध रखते हैं। और सारे महकमे अपनी अपनी स्थिति के अनुसार बँधे- हुए नियमों के अनुसार काम करते हैं। इसका फल यह होता है कि आधिकारी और कर्मचारी लोग आलसी हो जाते हैं और एक मुद्दत के बने हुए रास्तों से जाने की उन्हें आदत हो जाती है। यदि कदाचित् गवर्नमेण्ट के महकमेशाही के किसी आदमी के सिर में कोई नई बात सूझी तो बाकी के सब लोग, कोल्हू के बैल की सी अपनी पुरानी राह छोड़कर, उस नई बात की तरफ

- * क्रिश्चियन लोगों के रोमन कैथलिक पन्थ की यह एक शाखा है । सोल- हवें शतक के प्रारंभ में इसे स्पेन के एक आदमी ने निकाला। पहले इस शाखा का बहुत आदर हुआ; पर पीछे से पोप महाराज इससे अप्रसन्न होगये । इस कारण इसकी वेहद अवनति हुई । पर यह शाखा अभी तक जीवित है। सेण्ट झेवियर नामक एक पादरी इस शाखा में बहुत प्रसिद्ध हुआ है। उसके नाम का एक कालेज वंबई में है। इस सम्प्रदायवाले बहुत मिताचारी और अकसर भी होते हैं । वे बहुधा विवाह नहीं करते।