पृष्ठ:स्त्रियों की पराधीनता.djvu/७३

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स्टेट्स में स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार दिलाने के लिए नियमित सभाएँ होती हैं और इस आन्दोलन को देशव्यापी बनाने के लिए कई संस्थाएँ स्थापित हुई हैं। इङ्गलैण्ड में यद्यपि बड़े ज़ोर-शोर का आन्दोलन नहीं शुरू हुआ, फिर भी कई बड़ी-बड़ी सभाएँ इस प्रयत्न में लगी हैं और स्त्रियों के समान अधिकार की बात चल रही है। उनका उद्देश यह है कि पार्लिमेण्ट में सभासद बन कर देश के शासन में वे भी भाग ले सकें। अपनी पराधीनता की जञ्जीर तोड़ने के लिए अमेरिका और इङ्गलैण्ड को ही स्त्रियाँ प्रयत्न नहीं कर रही हैं, बल्कि, फ्रान्स, इटली, स्विज़रलैण्ड और रशिया में भी यह प्रयत्न चल रहा है। इसके अलावा जो स्त्रियाँ इस आन्दोलन में प्रत्यक्ष रीति से भाग नहीं लेतीं और अपनी महत्त्वाकांक्षा को मन ही मन दाब रखती है उनकी संख्या कितनी अधिक होगी यह बताना सर्वथा अशक्य है। फिर इस बात के मानने के सबल कारण है कि यदि पुरुषों की ओर से स्त्रियों में निरन्तर ऐसे भाव न ठूँसे जायँ कि स्त्रियों को यह महत्त्वाकांक्षा शोभा नहीं देती इसलिये इसे त्याग देना चाहिए, तो अवश्य स्त्रियाँ अपनी स्वाधीनता जल्दी ही लौटा लेवें।

फिर एक बात और ध्यान देने योग्य है कि जो वर्ग सर्वथा पराधीन होता है, वह कभी नहीं माँगता कि मुझे एक बार ही सम्पूर्ण स्वाधीनता मिल जाय। जब साइमन-