पृष्ठ:स्त्रियों की पराधीनता.djvu/७१

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इङ्गलैण्ड वालों को यह बात अचम्भा या अस्वाभाविक नहीं मालूम होती क्योंकि इससे वे परिचित हैं; पर इन्हीं अँगरेज़ों की यह बात अस्वाभाविक मालूम होगी कि औरतें पार्लिमेण्ट में बैठें और फौजों में भर्ती हों। दूसरी ओर पुराने समय में युद्ध और राजकार्य में स्त्रियों का भाग लेना लोगों को अस्वाभाविक नहीं मालूम होता था, क्योंकि यह बात उस समय प्रायः सर्वमान्य थी। उस समय के लोगों की धारणा थी कि अधिकारी-वर्ग की स्त्रियाँ अपने स्वामियों से शारीरिक सामर्थ्य के सिवाय अन्य किसी बात में कम न होनी चाहिएँ। ग्रीक लोगों की प्राचीन दन्तकथाओं में ऐमेज़ोन (Amazons) नामक युद्ध-कुशल स्त्रियाँ प्रसिद्ध हैं, इस ही प्रकार स्पार्टन लोगों ने अपनी स्त्रियों की वीरता के उदाहरण प्रत्यक्ष देखे थे, इसलिये उन्हें स्त्रियों का स्वातन्त्र्य उतना विस्मयकारक नहीं मालूम होता था। न्याय और क़ायदे की दृष्टि से एक स्पार्टन स्त्री एक ग्रीक राज्य की स्त्री से अधिक स्वाधीन नहीं थी, किन्तु प्रत्यक्ष व्यवहार में उन्हें ज़ियादा आज़ादी थी, और व्यायाम तथा शारीरिक श्रम के कारण उनके शरीर पुरुषों के समान सबल और चुस्त होते थे, इसे उन्होंने बहुत बार प्रत्यक्ष उदाहरणों से भी सिद्ध कर दिया था। प्लेटो (अफ़लातून) ने अपना या सिद्धान्त कि, सामाजिक और राजनैतिक विषयों में स्त्री-पुरुषों को समान अधिकार होने चाहिएँ-स्पार्टा देश की स्त्रियों को ही देख कर बनाया होगा, इस में सन्देह नहीं।