पृष्ठ:स्त्रियों की पराधीनता.djvu/१८८

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सकते हैं। दूसरी कैथराइन के समान शिथिल आचरण वाली रानी शायद ही कहीं मिले, पर उसके राज्य में भी कभी यह नहीं घटा। और राज्यकर्तृ रानियों पर पुरुषों का अधिकार होने से जो राज्य का अच्छा होना बताया जाता है-ऐसा संयोग उपस्थित होने पर अर्थात् अपने जार को राज्यतन्त्र की डोर सौंप देने पर, तो राज्य कभी अच्छा होता ही नहीं-ऐसे दृष्टान्तों से कोई राज्य पूरा नहीं उतरा। यदि राजाओं के राज्य से रानियों के राज्य की डोर विशेष बुद्धिमान् मन्त्रियों के हाथ में होनी सच मानी जाती हो, तो इसका कारण यही होना चाहिए कि अच्छे मन्त्री चुनने की बुद्धि स्त्रियों में विशेष होती है। साथ ही यह बात भी मंज़ूर करनी चाहिए कि राज्य करने में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियाँ अधिक योग्य हैं, तथा प्रधान मन्त्री के पद के भी वे योग्य हैं, और बड़े बड़े ओहदों को वे योग्यता से चला सकती हैं। क्योंकि तमाम राज को अकेले चलाना राजा या प्रधान मन्त्री का ही काम नहीं होता; बल्कि उनका काम यह होता है, कि राज्य भर में से योग्य से योग्य व्यक्ति चुनकर उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार पद देते हैं। इस बात को पुरुष भी स्वीकार करते है कि मनुष्य की परीक्षा करने में स्त्रियाँ पुरुषों से योग्य हैं; यदि अन्य गुणों में वे पुरुषों का मुकाबिला थोड़ा-बहुत भी कर सकती हों, तो सत्वर परीक्षा के गुण के कारण राजकार्य चलाने के विशेष योग्य वे ही हैं।