पृष्ठ:स्त्रियों की पराधीनता.djvu/१६६

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अपने समान बना लेने का विशेष प्रयास इन्होंने कई बार किया, अर्थात् बाइबिल की जगह क़ुरान प्रचलित करने की कोशिश की गई और सुधार के मार्ग में विघ्न डाले। इस पर विशेषता यह कि इन लोगों की सत्ता भी प्रबल हो गई थी, और इनका सामना करने वाले बहुत से मनुष्यों को इस संसार से विदा लेनी पड़ी थी; पर फिर भी इनका प्रयास व्यर्थ हुआ। यह बात ध्यान में रखने योग्य है कि इनका सामना करने वाले लोग समय-समय पर प्रकट हो जाते थे इसलिए ही हम वर्तमान स्थिति पर पहुँचे, और अब इससे भी उत्तम स्थिति पर पहुँच सकेंगे।

१५-स्त्रियों की पराधीनता के विषय में अब तक जो कुछ विवेचना की गई है, इसका लक्ष्यपूर्वक जिसने अनुसरण किया होगा, उसके ध्यान में स्त्रियों पर पुरुषों के मौरूसी हक़ के विषय में तमाम अनुचित बातें आ गई होंगी, और उसके लिए अधिक लिखने की आवश्यकता नहीं है। विवाह होने से पहले अपने मौरूसी हक़ से, या अपने हाथकी कमाई से जिस स्त्री ने सम्पत्ति सम्पादन की हो, विवाह के बाद भी उस सम्पत्ति पर उसका अविवाहित दशा के समान हक़ रहना जो लोग अनुचित समझते हों-जो लोग पूर्ववत् हक़ स्वीकार करने के लिए दलीलें और सुबूत चाहते हों-उन लोगों पर इस ग्रन्थ का असर होना महा कठिन है-उनके लिए यह व्यर्थ है। स्त्री-धन के विषय में, मैं जिस नियम का प्रतिपादन