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छयालीस] से पूर्ण था। उसमें निर्वासित अज्ञात कर्मचारियों के लिये बहुत सी हिदायते अङ्कित थीं। इस पत्र ने जोजफ को साधा- रण सिपाही के दर्जे से निकाल कर अफसर की पदवी तक पहुँचा दिया। अन्यथा कोई कारण न था कि लेनिन उस पत्र में पार्टी के पिछले कार्यों पर इतनी कड़ी नुकताचीनी करता और प्रभाव. पूर्ण एवं स्पष्ट शब्दों में उसके भावी उद्देश्यों पर विवाद करता । इस प्रकार की चिट्ठी किसी गुमनाम सिपाही को हरगिजा नहीं लिखी जा सकती थी। इस प्रकार का विचार-विनिमय किसी उच्चाधिकारी के साथ ही सम्भव हो सकता था। इसके कई वर्ष बाद तक जब कभी स्टालिन इस. प्रथम पत्र का जिकर करता तो वह हमेशा इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया करता था- "सभी क्रान्तिकारियों के समान मैंने भी इस पत्र को पढ़ कर जला दिया था कि कहीं वह अन्य किसी व्यक्ति के हाथ न पड़ जावे । किन्तु मुझे इस बात के लिये सदैव खेद रहेगा कि मैंने इस अवसर पर भी एक साधारण नियम का पालन किया। यद्यपि उचित यह था कि मैं उस नियम की अवज्ञा करके भी उस पत्र को अपने पास रखता।" जोजफ की गिरफ्तारी और दण्डाज्ञा १६०२ ई० में हुई थी। उसे साइबेरिया तोन वर्ष के लिये भेजा गया था। लेकिन वह डेढ़ वर्ष में ही स्वतंत्र हो गया। यह बाद में पता चला कि उसे साइबेरिया के अकेटसा प्रान्त के जिस छोटे से नवाजा ओदा प्राम में रक्खा गया था, वह वहां से गायब हो गया । यह वह समय था जब इस पार्टी के दो भाग हो चुके थे। एक का नाम बोलशेविक प्रसिद्ध था और दूसरी का नाम मेनसेविक स्टालिन ने निसंकोच बोलशेविक दल पसन्द किया, जिसका नेता लेनिन था। परिणाम यह हुआ कि पार्टी की अगली