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सितार मालिका रहीमसेन कीर्तिमान सितारवादक अमृतसेन जी के पिता उ० रहीम सेन अपने युग के अद्वि- तीय सितारवादक थे। सच तो यह है कि इनके चमत्कृत सितारवादन के फलस्वरूप इनके यहाँ परम्परा से चली आने वाली 'तानसेन की ध्रुपद गायकी' अस्त हो गई। रहीमसेन के पिता का नाम सुखसेन जी था। आपको गायकी इतनी मधुर थी कि लोग इन्हें 'सुख-चैन' के नाम से पुकारा करते थे । रहीमसेन अपने पिता से भलीभांति गायन-शिक्षा भी न ले पाये थे कि पिता का स्वर्गवास हो गया । इस घटना के कारण रहीमसेन की रुचि गायकी से हट गई और इन्होंने अपने श्वसुर दूल्हे खाँ से सितार की तालीम लेना प्रारम्भ कर दिया। उस समय सितार जैसे वाद्य को अधिक महत्व प्राप्त न था। रहीमसेन जब सितार का अभ्यास करने लगे तो अनेक व्यक्तियों ने इन पर छींटा- कशी की; किन्तु ऐसी बातों पर ध्यान न देकर इन्होंने आत्मविश्वास के साथ, पूरी शक्ति से अपना रियान जारी रक्खा । कुछ वर्षों की साधना के पश्चात् रहीमसेन वीणा, ध्रुपद-धमार एवं ख्याल गायकी की समस्त विशेषताएँ सरलतापूर्वक सितार पर प्रदर्शित करने लगे। फिर क्या था बड़े-बड़े संगीतज्ञ इनकी प्रतिभा का लोहा मान गये। लखनऊ, दिल्ली, कलकत्ता आदि भारत के बड़े-बड़े नगरों में उ० रहीमसेन के सितार वादन की धूम मच गई। अनेक सङ्गीत जल्सों में भाग लेकर इन्होंने सहस्रों संगीत- प्रेमियों के हृदय में अपना घर बना लिया। सितार वादन को, संगीत के क्षेत्र में श्रेष्ठतम स्थान प्राप्त कराने का प्रथम श्रेय रहीमसेन को ही दिया जाता है। . 1 मुश्ताकअली खाँ सेनिया घराने के प्रणेता उत्कृष्ट संगीतज्ञ, नायक धुंदू का नाम संगीत के इतिहास में अमर रहेगा। मुश्ताक अलीखाँ इसी प्रसिद्ध घराने के वंशज हैं। आपके पिता आशिक्क- अली खाँ उच्चकोटि के सितार वादक थे; उन्होंने उस्ताद बरकतुल्लाह से संगीत-शिक्षा प्राप्त की थी। मुश्ताकअली खाँ को स्वयं अपने पिता से सितार सीखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। १६ वर्ष की आयु में सितार पर इन्हें अच्छी तरह अधिकार होगया, तत्पश्चात् अविरल साधना और आनुवंशिक प्राकृतिक गुणों के कारण आप क्रमशः उन्नति के पथ पर अग्रसर होते गये। वर्तमान सितारवादकों में मुश्ताकअली खाँ का महत्वपूर्ण स्थान है । देश के विभिन्न भागों में होने वाले संगीत सम्मेलनों, विशेषतः आकाशवाणी केन्द्रों से आपका सितार वादन सुना जा सकता है । ऑल इन्डिया रेडियो, दिल्ली से प्रसारित होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में भी आप भाग ले चुके हैं ।