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रुचि की विभिन्नता
 

इस विषय में पुस्तक-विक्रेताओं ने बड़े महत्व की बातें कही हैं। जिससे भिन्न-भिन्न श्रेणियों और जातियों की साहित्यिक प्रवृत्ति का ठीक पता चल जाता है। उनका कहना है कि स्त्रियों को सरस साहित्य से विशेष प्रेम है, और मर्दों को गम्भीर साहित्य से। नये पुस्तकालयों में नये-से-नये उपन्यासों ही की प्रधानता होती है और ये पुस्तकालय स्त्रियों की ही कृपा दृष्टि पर चलते हैं। पुराने ढंग के पुस्तकालयों के ग्राहक अधिकतर पुरुष होते हैं, और उनमें भिन्न-भिन्न विषयों की पुस्तकें संग्रह की जाती हैं। हिन्दुस्तानी और युरोपियन महिलाओं की रुचि में भी बड़ा अन्तर है। यहाँ की देवियाँ उपयोगी विषयों की पुस्तकें पढ़ती हैं, जैसे पाकशास्त्र या गृह विज्ञान या शिशु-पालन आदि। इसके खिलाफ यूरोपियन स्त्रियाँ कथा कहानी, शृंगार और फैशन की पुस्तकों से ज्यादा प्रेम रखती है। दोनों जातियों के मनुष्यों की रुचि में भी अंतर है। युरोपियनों को मामूली तौर से कथा अधिक प्रिय है, हिन्दुस्तानियों को अर्थशास्त्र, जीवन-चरित्र, नीति विज्ञान आदि विषयों से ज्यादा प्रेम है। कुछ नवीनता के परम भक्त युवकों को छोड़कर हिन्दुस्तानियों में शायद ही कोई उपन्यास मोल लेता हो।

युरोपियन स्त्री पुरुषों का किस्से कहानी से प्रेम होना इसका प्रमाण है कि वह सम्पन्न हैं और उन्हें अब उपयोगी विषयों की आवश्यकता नहीं रही। जिसके सामने जीवन का प्रश्न इतना चिन्ताजनक नहीं है, वह क्यों न प्रेम और विलास की कथाएँ पढ़कर मन बहलाये। यह देख-

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