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साहित्य का उद्देश्य

कवि हैं और जीवन मे कविता का स्थान क्या है, यह खूब जानते हैं। आपने बहुत ठीक कहा, कि कविता केवल मनोरंजन की वस्तु नही और न गा-गाकर सुनाने की चीज है । वह तो हमारे हृदय मे प्रेरणाओं की डालने वाली, हमारे अवसाद-ग्रस्त मन मे अानन्दमय स्फूर्ति का सचार करने वाली, हममे कोमल भावनाओ को जगाने वाली ( स्त्रैण भावनात्रो को नहीं) वस्तु है । कविता मे अगर जागृति पैदा करने की शक्ति नहीं है, तो वह बेजान है । आप हाला बॉधे, या तन्त्री के तार, या बुलबुल और कफस, उसमें जीवन को तड़पाने वाली शक्ति होनी चाहिए । प्रेमि- कात्रो के सामने बैठकर ऑसू बहाने का यह जमाना नहीं है। उस व्यापार मे हमने कई सदियों खो दी, विरह का रोना रोते-रोते हम कहीं के न रहे । अब हमे ऐसे कवि चाहिए, जो हज़रते इकबाल की तरह हमारी मरी हुई हड्डियो मे जान डाले। देखिए, इस कवि ने लेनिन को खुदा के सामने ले जाकर क्या फ़रियाद कराई है और उसका खुदा पर इतना असर होता है कि वह अपने फरिश्तो को हुक्म देता है-

उहो, मेरी दुनिया के गरीबो को जगा दो,
काखे' उमरा के दरो- दीवार हिला दो।
गरमाअो गुलामो का लहू सोज़े यकीं से,
कुंजिश्कर फरोमाया को शाही से लड़ा दो।
सुलतानिये' जमहूर' का आता है ज़माना,
जो नक्शे कोहन' तुमको नज़र आये मिटा दो ।
जिस खेत से दहकों को मयस्सर नही रोटी,
उस खेत के हर खोशए गदुम को जला दो।
क्यो खालिको मखलूक ११ मे हायल रहे परदे,
पीराने कलीसा को कलीसा'३ से उठा दो।


(१) महल (२) चिड़ा (३) तुच्छ (४) शिका (५-६) प्रजा-राज्य (७) पुराना (८) किसान (8) गेहूँ की बाल (१०) स्रष्टा (११) सृष्टि. (१२) मठधारी (१३) गिरजे ।