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देशव्यापक भाषा

हिन्दी लिपि के गुणों का वर्णन बड़े बड़े पाश्चात्य विद्वानों ने किया है उसे गवर्नमेंट को भी स्वीकार करना चाहिए । सब लोगों को भी उसे देश-ब्यापक लिपि बनाने की चेष्टा करनी चाहिए; गवर्नमेंट से उन्हें प्रार्थना भी करनी चाचिए । गवर्नमेंट तभी बाधा देगी जब लोकमत में विरोध होगा; अन्यथा नहीं' और यदि उसने यह प्रस्ताव न भी स्वीकार किया तो हिन्दी के विषय में चर्चा करते रहने, उसके व्यापक भाषा न होने के दोष बतलाने और सारे देश का एक मत होने से, किसी न किसी दिन, गवर्नमेंट अवश्य ही प्रजा का प्रस्ताव स्वीकार करेगी। देश में एक भाषा होने के गुण ऐसे गुरु, ऐसे प्रखर और ऐसे सर्व-सम्मत हैं कि गवर्नमेंट को शायद इस प्रस्ताव का विशेष विरोध न करना पड़े।

देश भर में एक लिपि और एक भाषा करने में जो कठिनाइयां जान पड़ती हैं वे सब उल्लंघनीय हैं। ये ऐसी नहीं जिनका प्रतिबन्ध न हो सके। सब प्रान्तों में देवनागरी लिपि प्रचलित करने का सहज उपाय यह है कि प्राइमरी (प्रारम्भिक) मदरसों में उसकी शिक्षा दी जाय। वदि ऐसा किया जाय तो बहुत ही थोड़े दिनों में इस लिपि का सब कहीं प्रचार हो जाय और शीघ्र ही प्रजा में सहानुभूति जागृत हो उठे। यदि एक सम्मत हो कर सब लोग गवर्नमेंट से इस विषय में प्रार्थना करें तो सर्वथा सम्भव है कि वह इस परमोचित प्रार्थना को स्वीकार कर ले और प्रारम्भिक मदरसों में, और और विषयों के साथ, नागरी लिपि का भी प्रचार कर दे। परन्तु, कल्पना