पृष्ठ:साम्राज्यवाद, पूंजीवाद की चरम अवस्था.djvu/७१

यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

इन आंकड़ों के अनुसार बड़े बैंकों के पास "कार्यवाहक" पूंजी के रूप में लगभग चार अरब रूबल की जो रक़म थी , उसका तीन-चौथाई से अधिक भाग, अर्थात् तीन अरब से अधिक , ऐसे बैंकों के हाथों में था जो वास्तव में विदेशी बैंकों की केवल "बेटी कम्पनियां" थीं, और वह भी मुख्यतः पेरिस के बैंकों (वह प्रख्यात त्रिगुट : «Union Parisienne», «Paris et Pays-Basu तथा «Sociéte Générales) की और बर्लिन के बैंकों (विशेषतः «Deutsche Bank» और «Disconto-Gesellschaft») की। रूस के दो सबसे बड़े बैंकों ने , रूसी (वैदेशिक व्यापार का रूसी बैंक ) और इंटरनेशनल (सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल कामर्शियल बैंक) ने , “तीन-चौथाई जर्मन पूंजी के सहारे” १९०६ और १९१२ के बीच अपनी पूंजी ४,४०,००,००० रूबल से बढ़ाकर ९,८०,००,००० रूबल और अपनी संरक्षित निधि १,५०,००,००० रूबल से बढ़ाकर ३,९०,००,००० रुबल कर ली। इनमें से पहला बैंक बर्लिन «Deutsche Bank» के “समूह" का अंग है और दूसरा बर्लिन «Disconto-Gesellschaft» का। हमारे सुयोग्य अगाह द-महोदय इस बात पर बहुत नाराज़ हैं कि अधिकांश शेयर बर्लिन के बैंकों के हाथों में हैं और इस कारण रूसी शेयरहोल्डर लाचार हैं। स्वाभाविक बात है कि जो देश पूंजी का निर्यात करता है वह दूध-मलाई खुद अपने लिए रखता है : उदाहरण के लिए, जब बर्लिन «Deutsche Bank» साइबेरियाई कामर्शियल बैंक के शेयर बर्लिन के बाज़ार में लाया तो उसने वास्तव में पूरे साल भर तक उन्हें अपनी जेब में रखा और उसके बाद उन्हें १०० के १९३ के भाव बेच दिया, अर्थात् उनके अंकित मूल के लगभग दुगने भाव पर और इस प्रकार लगभग ६०,००,००० रूबल का मुनाफ़ा कमाया, जिसे हिल्फ़र्डिंग “सौदा पटानेवाले का मुनाफ़ा" कहते हैं।

हमारे लेखक ने सेंट पीटर्सबर्ग के मुख्य बैंकों की कुल “क्षमता ८,२३,५०,००,००० रूबल, लगभग ८.२५ अरब रूबल, आंकी

७१