पृष्ठ:सरस्वती १६.djvu/१५१

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raru - . स्त्रामा हिमालय दर्शन का मानन्द टिप स्नानका - स्वामी मानसगर सत्यदेवजी रचित मेरी कैलाश यात्रा व पुरमा थाठ याने थादशः पढ़िए । ऐसा मगा उपन्यास, मांगा दगा दिमाप्तम का| १८३०० फीट बन माज सक हिन्दो माग में नहीं दपाश्री लागी । ऊच घाट के मध्य मन्दिर न कोनि मगाय प्रामाप मानिए। के जीवन रवीर मानमराबर के शुन्दर पापन जन कीरदा देगिए। | Pri - . दुसरी पुस्तक 'दाम शिक्षा का प्रादशे खि पाँच थाने । दाम पौर या 3. म्यामामी का प्रश्मिय गायान ला मम्मी मम PETE परियार Her म. पीरम-र मार मारतापान का मर्मत मे पागी पुणm m mar कीजिए। मिर- मनजर. सत्य-प्रन्य-माना, जाननगा. इलाहामा . .पार गरी यस. ...