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सिक्का और उसकी सुविधायें

सिक्का और उसकी सुविधायें १११ प्रकार रोज़ जितने चैक कटते हैं, वे अलग-अलग बैंकों के पास पहुँच जाते हैं और हरएक पैंक को पता चलता है कि कुछ चेकों का तो उसे दूसरे बैंकों को रुपया देना है और कुछ का दूसरे बैंकों से वसूल करना है। यदि इन सब चकों की रकम इकट्ठी जोड़ी जाय तो लाखों रुपये तक हो सकती है, किन्तु दी जाने और ली जाने वाली रकम का अंतर कुछ सौ रुपया या इससे भी कम हो सकता है। इस तरह बैंकों ने Clearing house नाम की संस्था खड़ी की है जो यह मालूम करती है कि हरएक बैंक को शेप कितनी रकम देनी या लेनी है । इस तरह भारी-भारी रक्रमों के व्यवहार कुछ सौ रुपये इस बैंक से उस बैंक को भेज देने मात्र से निपट जाते हैं। किंतु अब बैंकों ने कुछ सौ रुपया भी इधर-से-उधर भेजने की दिवस को मिटा दिया है। वे एक बड़े बैंक में अपने हिसाब खोल लेते हैं, जिससे उनके वापस के हिसाब बड़े बैंक के रजिस्टरों में दो-चार अंक इधर-उधर लिख देने से ही तय हो जाते हैं और लाखों- करोड़ों का व्यापार सिका या नोटों का उपयोग किये बिना ही हो जाता है। इस प्रकार हिसाब का रुपया अधिकाधिक असली रूपये का स्थान ले रहा है और जो माल खरीदा या बेचा जाता है, उसके लिये सिके और नोट सुलभ करने का खर्च प्रतिशत यरावर कम होता जा रहा है। रुपये की कीमत अधिक हो या कम, वह स्थिर रहनी चाहिए। जब वह स्थिर नहीं रहती तभी लोगों को अड़चन होती है । इसलिए यह जरूरी है कि उसकी स्थिरता कायम रखी जाय । सरकार को काग़ज़ के नोटी द्वारा यह स्थिरता कायम रखनी पड़ती है। यदि सोने के सिक्के का प्रचलन हो तो उसका मूल्य अपने-आप भी स्थिर रह सकेगा। नई सोने की खानो का पता लगने के कारण सोना अधिक मात्रा में सुलभ हो जाय तो भी सोने के सिक्के का मूल्य स्थिर रहेगा। इसका विचित्र कारण यह है कि दुनिया में सोने की मांग प्रायः अनन्त है । इसलिए जबतक पूँजीवादी प्रणाली जीवित है तबतक सरकारों की ईमानदारी के वजाय सोने की स्वाभाविक स्थिरता पर विश्वास करना हो अधिक बुद्धिमानी का काम होगा।