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पूँजी और श्रम का संघर्ष

पूजी और श्रम का मंवर्ष १२७ एक-दूसरे से बहुत दूर-दूर काम करने के कारण कठिनता से संगटित किये जा सकते थे और उनके संगन को अधिक समय तक बनाये रखना तो और भी कठिन था। कारखानो, सानों और रेलों के मजदूरों के अलावा प्रायः अन्य सभी प्रकार के धन्धों में काम करने वाले मजदूरों के संगठन के सम्बन्ध में कम या अधिक यही बात कही जा सकती है। कुछ व्यवसायों में वेतन और सामाजिक स्थिति की भिन्नता के कारण उनमें काम करने वाले मजदूरों का संगठन कठिन होता है। रंग-मंच पर हैमलेट का अभिनय करने वाला अभिनेता कोई पदवीधारी अत्यन्त सम्पन्न पुरुप हो सकता है और पोर्शिया का अभिनय करने वाली अभिनेत्री कोई अत्यन्त उच्च घराने की पदवीधारी महिला हो सकती है। उन्हें सैकड़ों गिन्नियाँ प्रति सप्ताह वेतन के रूप में मिल सकती है। उनके साथ ऐसे लोग भी अभिनय करते हैं जो यदि एक भी शब्द मुँह से निकाल देतो वे अपनी बोली से तुरन्त पहिचान लिए जायं कि वे दरबारी पोशाक पहिने हुए होने पर भी दरबारी लोग नहीं हैं। उनको पर्दा गिराने वाले मामूली नौकरों के बराबर भी वेतन नहीं दिया जाता। यह भी हो सकता है कि किसी बुनकर या किसान को हैमलेट का अभिनय करने वाले अभिनेता की अपेक्षा अधिक वेतन मिलता हो; किन्नु बुनकर या किसान का दैनिक व्यवहार हैमलेट के अभिनेता की अपेक्षा इतना असंस्कृत होता है कि हैमलेट का अभिनेता बुनकर या किमान के साथ शायद बातचीत और भोजन करना भी पसन्द न करेगा इस कारण अभिनेताओं का संघ बनाना कठिन है। संघ उन्हीं व्यवसायाँ में संगठित किये जा सकते हैं जिनमें लोग बड़े-बडे समूहों में साथ-साथ काम करते हॉ, एक ही पड़ोस में रहते हो, एक ही सामाजिक श्रेणी के हॉ और समान वेतन पाते हों । इंग्लैण्ड में कोयले की खानों के खनिकों ने, लंकाशायर के कपड़े के कारखानों के वुनकरों ने, मिडलैण्ड के लोहे के कारखानों में लोहा पिघलाने और ढालने वालों ने सर्व प्रथम स्थायी और दृढ़ संघ संगटित किये । राज, खाती श्रादि इमारती काम करने वाले मजदूर भी मालिकों की ओर से किये जाने वाले असा अन्याय से क्षुब्ध