पृष्ठ:सचित्र महाभारत.djvu/८

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है। श्राख्यान-लेखक महाशय ने इस काम का बड़ी योग्यता से किया है। आपकी पुस्तक में महाभारत का एक भी महत्त्व-पूर्ण अंश नहीं छूटने पाया । जिननी प्रधान प्रधान घटनायें हैं सब ले ली गई हैं-अप्रधान घटनाओं का विस्तार कम कर दिया गया है और जिन अवान्तर बातों की तादृश ज़रूरत न थी वे छोड़ दी गई हैं । मतलब यह कि पुस्तक में सारी प्रयोजनीय बातों का समावेश हुआ है । बँगला जाननेवालों में इस पुस्तक का बड़ा आदर है । श्राबाल-वृद्ध-बनिता सभी इसे पढ़ते हैं। यह पुस्तक इसी पूर्वोक्त बँगला-पुस्तक का अनुवाद है। अनुवाद स्वच्छन्दतापूर्वक किया गया है । जहाँ तक हो सकता है अनुवाद में बोलचाल की सीधी सादी भाषा से काम लिया गया है। क्लिष्टता न आने देने का यथासम्भव यत्न किया गया है। सम्भव है. फिर भी कहीं कहीं पर किसी को किग्रता जान पड़े। इसके लिए यदि कोई अनवादक पर दोषारोप करना चाहे तो कर सकता है। परन्तु दोपदाता को यह सोच लेना चाहिए कि क्लिष्टता कहते किसे हैं। जो वाक्य, वाक्यांश, या शब्द एक आदमी के लिए सरल हैं वही दूसरे के लिए क्लिष्ट हो सकते हैं। क्योंकि क्लिष्टता और सरलता पढ़नेवाले के भाषा-ज्ञान की न्यूनाधिकना पर अवलम्बित रहती है । जुही, कानपुर, २८ आक्टोबर १९०८ महावीरप्रसाद द्विवेदी