पृष्ठ:संगीत विशारद.djvu/६२

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  • सङ्गीत विशारद *

६५ Istrition 5 उत्पन्न ( पैदा) हुआ है, इसीलिये इस थाट का नाम भी "भैरव थाट" रख दिया । इसी प्रकार अन्य थाटों के नाम रखे गये हैं। प्रत्येक थाट में स्वर तो केवल ७ ही होते हैं लेकिन उनके स्वरों में कोमल तीव्र का अन्तर पड़ जाता है । इस अन्तर या फर्क से ही तरह-तरह के थाट बना लिये गये हैं। यमन बिलावल और खमाजी, भैरव पूरवि मारुव काफी । आसा भैरवि तोड़ि बखाने, दशमित ठाठ चतुर गुन माने ॥ चतुर पंडित की इस कविता से १० थाटों के नाम आसानी से याद हो जाते हैं। नीचे १० थाटों में लगने वाले कोमल व तीव्र स्वर दिखाये गये हैं: दस थाटों के सांकेतिक चिन्ह १ यमन या कल्याण थाट-सा रे ग म प ध नि सां २ बिलावल थाट सा रे ग म प ध नि सां ३ खमाज थाट सा रे ग म प ध नि सां ४ भैरव थाट सा रे ग म प धु ५ पूर्वी थाट सा रे ग म प ६ मारवा थाट सा रे ग म प ध ७ काफी थाट रे ग म प ८ आसावरी थाट सा रे ग म प ध ६ भैरवी थाट सा रे ग म प ध नि १० तोड़ी थाट- सा रे ग म प ध नि सां ७२ थाट केसे बनते हैं ? एक सप्तक के १२ स्वरों से ७२ थाट कैसे बनते है, इसे समझाते हैं। सा रे रे ग ग म म प ध ध नि नि । इन १२ स्वरों में से कुछ देर के लिये म (तीव्र मध्यम) हटा दीजिये और ऊपर की सप्तक का सां जोड़कर स्वर संख्या १२ पूरी कर लीजिये । अब यह स्वरूप होगया। सा रे रे ग ग म प ध ध नि नि सां । इस स्वर समुदाय के २ भाग कर दिये तो पहिले ६ स्वर वाले समुदाय का नाम पूर्वार्ध और आगे के ६ स्वरों के समुदाय को उत्तरार्ध कहेंगे। पूर्वार्ध उत्तरार्ध सा रे रे ग ग म प ध ध नि नि मां अब यह देखिये कि प्रत्येक ६ स्वरों के समुदाय को उलट-पलट कर रखने से चार-चार स्वरों वाले कितने “मेल" बन सकते हैं। पहिले पूर्वार्ध वाले स्वर समुदाय को लेकर चलते हैं: “可可可可可可可可