पृष्ठ:संगीत विशारद.djvu/५६

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  • सङ्गीत विशारद *

२-दोनों ही विद्वानों ने तीव्र निषाद को भिन्न रीति से वीणा के तार पर स्थापित करके ___एकमत से उसकी लम्बाई (१६१ इञ्च ) स्वीकार की है। ३-दोनों ही विद्वानों ने कोमल रिषभ, तीव्र मध्यम और कोमल धैवत यह ३ स्वर वीणा के तार पर भिन्न-भिन्न रीति से स्थापित किये हैं। ४-कोमल रे, कोमल ध, और तीव्र म को छोड़कर शेष स्वर स्थान दोनों ही विद्वानों के एक से हैं। ५-दोनों ही विद्वानों के शुद्ध स्वरों तथा कोमल गन्धार और कोमल निषाद के स्थानों को वर्तमान सङ्गीतज्ञ मानते है और वे हिन्दुस्थानी सङ्गीत पद्धति में प्रचलित हैं। मतभेद (असमानता) श्रीनिवास मंजरीकार ( भातखण्डे ) १-शुद्ध थाट में गन्धार निषाद कोमल | १–शुद्ध थाट में गन्धार निषाद तीव्र (शुद्ध) रखते है। रखते हैं। २-हमारे काफी ठाठ को शुद्ध थाट मानते हैं। २-बिलावल थाट को शुद्ध थाट मानते हैं। ३-सा और रे के तार की लम्बाई के तीन, ३-सा और रे के तार की लम्बाई के दो भाग करके सा से दूसरे भाग पर कोमल रे | भाग करके इन दोनों स्वरों के ठीक स्थापित करते हैं, जिसकी लम्बाई घुड़च मध्य में कोमल रे की स्थापना करते हैं, से ३३ इञ्च होती है। जिसकी लम्बाई घुड़च से ३४ इञ्च ४-कोमल धैवत २२६ इञ्च पर स्थापित होती है। करते हैं। |४-कोमल धैवत २२ इन्च पर स्थापित ५-तीव्र निषाद १६१ इन्च पर स्थापित करते हैं। करते हैं। ५-तीव्र निषाद १६ इन्च पर स्थापित ६-तीव्र निषाद का स्थान निकालने के लिये करते हैं। तीव्र ध और तार षड़ज के तार की लम्बाई के तीन भाग करके तीव्र ध से ६-षड़ज पंचम भाव से तीव्र निषाद की दूसरे भाग पर तीव्र नि वीणा पर लम्बाई निकाल कर वीणा पर इसका स्थान निश्चित करते हैं। ७-तीव्रतर मध्यम ३५१ इन्च पर स्थापित ७–तीव्र मध्यम २५१ इन्च पर स्थापित करते हैं। करते हैं। ८-कोमल रिषभ ३३२ इन्च पर स्थापित. -कोमल रिषभ ३४ इन्च पर स्थापित करते हैं, क्योंकि इन्होंने सा और रे की करते हैं। क्योंकि इन्होंने सा और रे लम्बाई के ३ भाग करके कोमल रे को की लम्बाई के २ भाग करके उनके मध्य -,मा.मे.टमा माग र मग है।... में कोमल रिषभ माना है।