पृष्ठ:संगीत-परिचय भाग २.djvu/४५

यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
( ५२ )
पाठ १५

राग भैरवी


१-इस राग में सात स्वर लगते हैं।

२-इस राग में रे॒ ग॒ ध॒ नी॒' कोमल बाकी सब स्वर शुद्ध
लगते हैं।

३-इस राग का वादी स्वर 'म' है।
४-इस राग का संवादी स्वर 'स' है।

५-इसके गाने-बजाने का समय प्रातः ६ बजे तक है ।

आरोही स रे॒ ग॒ म प ध॒ नी॒ सं

अवरोही सं नी॒ ध॒ प म ग॒ रे॒ स

राग भैरवी

ताल सरगम

ताल तीन मात्रा १६

स्थाई


x


म प ध॒ प
सं नी॒ ध॒ प





म प म ग॒
म ग॒ रे॒ स




͎नी॒ स ग॒ म
स रे॒ ग॒ म




ध॒ — प —
प ध॒ नी॒ सं

अन्तरा



͢गं ͢रें सं नी॒
नी॒ ध॒ प म



सं — सं —
ग॒ रे॒ स —


ग॒ म ध॒ नी॒
͢गं ͢रें सं नी॒


सं — सं —
ध॒ प म प