पृष्ठ:संगीत-परिचय भाग १.djvu/६०

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स्वतन्त्रता के भीषण रण में।
लख कर जोश बढ़े क्षण क्षण में ।।
काँपे शत्र देख कर मन में।
मिट जाये भय संकट सारा ।।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा ।। २


इस झण्डे के नीचे निर्भय,
लिये स्वराज्य हम अविचल निश्चय ।।
बोलो भारत माता की जय,
स्वतन्त्रता हो ध्येय हमारा ।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा ॥ ३


आओ प्यारे वीरो आओ,
देश धर्म पर बलि-बलि जाओ।
एक साथ सब मिल कर गावो,
प्यारा भारत देश हमारा ।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा ॥ ४


इसकी शान न जाने पावे,
चाहे जान भले ही जावे।
विश्व विजय हम कर दिखलायें,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा ।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा ॥ ५
विजयी विश्व निरहर प्यारा ।