पृष्ठ:वेनिस का बाँका.djvu/५८

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अष्टम परिच्छेद
 

कांटेराइनो―"इसमें तो सन्देह नहीं, इस समय उचित तो यह था कि हम लोग कमर कसकर तैयार हो जाते, परन्तु देखो कि हम लोग इसका क्या प्रतिकार कर रहे हैं? अपना समय हौलियों में नष्ट करते हैं, मदपान कर मारे मारे फिरते हैं जूआ खेलते हैं, और अपने को ऋण ग्रहण के ऐसे बड़े समुद्र में डालते हैं जिसके भीतर अच्छा से अच्छा पैराक मग्न हो जावे। हमको चाहिये कि दृढ़ होकर प्रयत्न करें, लोगों को अपना सहकारी बनावें, और तन मन से अपने उद्योग में परि- श्रम करें, फिर देखें कि हमारे दिन क्यों कर नहीं फिरते यदि न फिरें तो स्मरण रक्खो कि इस निर्लज्जता और अकीर्ति कर जीवन से तो मृत्यु उत्तम है"।

मिमो―"अब मेरी सुनो कि इधर छः महीने से मेरे महा- जन प्रत्येक समय मेरा कपाट खटखटाया करते हैं, प्रातःसमय निद्रा पूरी भी नहीं होने पाती कि वे आकर जगा देते हैं रातको भी उन्हीं के कोलाहल और ललकार से थक कर निद्रा आजाती है"।

परोजी―और मैं अपना हाल तुमसे क्या बताऊँ कि मुझ पर क्या बीतती है।

फलीरी―"यदि हमने अपव्यय न किया होता तो आज अपने प्रसाद में सुखपूर्वक बैठे होते और―परन्तु अब जो कुछ हमारी दशा है उसे―"।

परोजी―"बस अब जो कुछ दशा है उसी की चर्चा करो, भला फलीरी! इस समय उपदेश करने की कौन आवश्यकता है,।

काण्टेराइनो―"इनका क्या सभी पुराने पापियों का यही ढंग है कि जब अपराध करने का अवसर नहीं रहता और न