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वेनिस का बांका
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कालबाद रोज़ाबिलाने कहा "फ्लोडोआर्डो मैं तुम्हें प्राण से

अधिकतर समझती हूँ" प्रत्युत्तर में उसने रोजाबिला को अपने हृदय से लगा कर पहले पहल उसके शोणाधर को चुम्बन किया" अचाञ्चक उसी समय द्वार कपाट खटसे खुल गया और नृपति अंड्रियास तत्काल गृह में प्रविष्ट हुए। उनके शीघ्र पलट आने का यह कारण था कि जिस मनुष्य के समागम के लिये वे गये थे वह दैवात् बीमार हो गया इस लिये उन्हें अधिककाल पर्य्यन्त बाहर न ठहरना पड़ा। महाराज के परि- च्छेद की खड़खड़ाहट की ध्वनि से दोनों प्रेमी और प्रेयसी आमोद की निद्रा से चौंक पड़े। रोजाबिला भय से चिल्लाकर पृथक् हो गई, और फ्लोडोआर्डो निज स्थान से उठ खड़ा हुआ परन्तु उसने किसी प्रकार की ब्यग्रता नहीं प्रगट की।

अंड्रियास कुछ काल पर्य्यन्त दोनों को इस प्रकार घूरा किये जिससे सम्पूर्णतः कोप, खेद और निराशा टपकती थी। अन्त में उन्होंने एक शीतलोछास भर कर आकाश की ओर अवलोकन किया और फिर चुपचाप लौट कर जाने लगे। इस समय फ्लोडोआर्डो ने जी कड़ा करके कहा "महाराज एकक्षण के लिये ठहर जाइये, शब्द सुनकर महाराज लौट पड़े। फ्लोडो- आर्डो ने अपने को उनके युगल ललित पदों पर डोल दिया! अंड्रियास उसे कुछ काल तक अत्यन्त गम्भीरता के साथ देखते रहे और इसके उपरान्त कहने लगे फ्लोडोआर्डो यदि तुम अपने अपराध की क्षमा चाहते हो तो व्यर्थ है"।

फ्लोडोआर्डो अत्यन्त धृष्टता के साथ उत्तर दिया क्षमा चाहना, नहीं महाशय मैं रोजाबिला पर मोहित होने के लिये क्षमा नहीं माँगता, बरन क्षमा माँगना तो उसे चाहिये था जिसने रोजाबिला को देखा होता और उस पर मोहित न हुआ होता परन्तु यदि रोजाबिला पर मोहित होना अपराध है तो