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वेनिस का बांका
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सकती थी, और न उसको इतना समय प्राप्त हुआ कि वह निरोग हो जाने के उपरांत उसकी अभ्यर्थना करे क्योंकि वेनिस में आनेके छठे दिवस उसे लोगों ने एक मुख्य राज्योपवन में मृतक पाया। उसकी करवाल लहू भरी पड़ी थी और उसकी नोटबुक गुम थी, उसका केवल एक पत्र हस्तगत हुआ, जिसे किसीने उक्त पुस्तक से निकाल कर शोणित द्वारा यह लिख कर उसके वक्षस्थल पर लगा दिया था "जो पुरुष रोज़ाबिला के साथ पाणिग्रहण करने की आकांक्षो करेगा उसके लिये यही दण्ड उचित होगा" अबिलाइनो बांका"।

जब यह समाचार महाराज के कर्णगत हुआ तो उनकी संज्ञा नष्टप्राय हो गई, और वह शोकसे विह्वल होकर कहने लगे "हाय! अब मैं कहाँ पलायित हो कर जाऊँ, ऐसे दुस्समय में फ्लोआर्डो भी नहीं है, कि मेरा समाधान तो करता"। अब महाराज को अहर्निशि यही ध्यान था, कि किसी प्रकार फ्लोडोआर्डो यहाँ आजाता तो अतीवोत्तम होता, इसलिये कि ऐसी आपदो में उनकी सहायता करता। बारे परमेश्वर की अनुकंपा से उनकी मनोकामना सफल हुई, और फ्लोडोआर्डो यात्रा समाप्त करके फिर आया।

अंड्रियास―"प्रियवर! धन्य! अच्छे अवसर पर तुम आये, अगत्या तुम कभी मेरी दृष्टि से दूर न होना, मैं इस समय बिना आत्मरक्षक और सहायक का हो रहा हूँ, तुमने सुना होगा कि लोमेलाइनो और मान्फरोन"।

फ्लोडोआर्डो―(शोकितों कासा स्वरूप बनाकर) "मैं सब जानता हूँ"।

अंड्रियास―ऐसा ज्ञात होता है कि किसी महाराक्षस ने पुनर्जन्म ग्रहण किया है और अब वेनिसमें अबिलाइनो नाम रखकर मेरे सत्यानाश के लिये बद्धपरिकर है। अथवा प्रेत