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७ - स्थविरवाद भिक्षु-नियम मूलसर्वास्तिवाद -मेखिय ७५ ११२ 3--अधिकरण-समथ ३७१ इससे मालूम होगा, कि स्थविग्वादके विनयकी अपेक्षा मूलसर्वास्तिवादके विनयमें भिक्षुओंके ३५ और भिक्षुणियोंके ६० नियम अधिक है । खन्धक और विनयवस्तुके मिलानेपर भी मूलसर्वास्ति- वादमें अधिक परिच्छेद मिलते हैं। जिस प्रकार स्थविरबादियोंका खन्धक महावग्ग और चुल्लबग्ग (=क्षुद्रक-बर्ग) में बँटा है, वैसे ही मूलनर्वास्तिवादियोंका भी महावस्तु, क्षुद्रकवस्तु (=जुल्ल-बत्थु) दो भागोंमें बँटा है । क्षुद्रकवस्तुके बाद आये दो उनग्ग्रंथ तो क्षुद्रकवस्तुके ही परिशिष्ट हैं। पाली महा- वग्ग. चल्लबग्ग और महावस्तुके परिच्छेदोंवी तुलना इस प्रकार है-- महावस्तु महावर --पहाम्कन्भक १--प्रवज्यावस्तु


उपोसथस्कन्धक

--उपोसथवन्तु -बपिनायिकाम्कन्धक -वर्षावस्तु ८--प्रवारणाम्कन्धक 2--प्रवाणा वस्तु -चर्मरबन्धक ५--चर्मवस्तु --ज्यम्कन्धक --भाज्यवन्नु --वाटिनस्कन्धक (७-चीवरवस्तु ८--चीवरस्कन्धक 1८-कठिन-आस्थान-वस्तु --चम्पेयवस्तुम्कन्धक ९--कौगम्बकवस्तु १०--बौगम्बकम्कन्धक १०-कर्मवस्तु मुल्लबग्ग १ --कर्मम्बन्धक --पारिवासिकस्वन्धक ११-परिवासिकवस्तु 3-समुच्चयम्बन्धक १२--पृद्गलवस्तु ८--गमथ स्कन्धका 2:-रामशवन्तु ५.---अद्रकवस्तु म्वन्धक ( १६--अधिकरण-वस्तु --गयन-आसनस्कन्धक. १५-गायनामनवस्तु --संघभेदम्कन्धक

--संघभेदवम्नु

--तन्कन्धक • ----प्रातिमोभन्थपनम्कन्धयः १८--प्रानिमोक्ष स्थपन वन्नु न्य प्रकार चल्लवग्ग अन्तिम बंधकोंको छोट, बाकी सभी स्कन्धक महावस्तुम आ गये हैं। भरबागवः अगिट बंधक.. अद्रक - वस्तु में आ जाते है. और इनके अतिरिक्त वहाँ बहुतनी और लाने. जो कि पाली-विनय-टिक में नहीं मिलती। नमें दावार्य छोटी छोटी है, इनलिये इसे नकदन्नु-स्कंधक कहा गया है । 'मलमस्तिवाददे. दिन-पिटकका भोट-भादानदाद १२ पोथियों (ऽटुल-व क, ख, ग, ए.च.उ., E7. त, २. द. न. ५) में हुआ है जिनमे- महावस्तु 4,ख,ग,.