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कोपर्निकस

धिकारी रहता है। उसे पोप कहते हैं। धैर्म की बातों में वह सबका गुरु माना जाता है। उस समय पोप को यहाँ तक अधिकार था कि धर्म-ग्रन्थों के प्रतिकूल जो मनुष्य एक शब्द भीं कहता था उसे कड़ा दण्ड मिलता था। धार्म्मिक लोगों की समझ में पृथ्वी अचल थी; परन्तु कोपर्निकस की पुस्तक में यह बात झूठ सिद्ध की गई थी। इसलिए उसे अपनी पुस्तक के छपाने में बहुत दिन तक सङ्कोच रहा। परन्तु मित्रो के कहने से अपना हृदय कड़ा करके उसने उसे छपा ही दिया। छपने के अनन्तर यदि वह कुछ दिन जीता रहता तो शायद उसे वही दुःख भोगने पड़ते जो गैलीलियो को भोगने पड़े। ७० वर्ष की अवस्था में कोपर्निकस की मृत्यु हुई।

कोपर्निकस के अनन्तर योरप से दूसरा प्रसिद्ध ज्योतिषी गैलीलियो हुआ। उसका जन्म, इटली के पिसा नामक नगर में, १५६४ ईसवी में, हुआ। गैलीलियो के बाप की इच्छा थी कि वह वैद्यक पढ़े; परन्तु उसको वह विषय अच्छा नहीं लगा। उसे गणित और पदार्थ-विज्ञान अधिक प्रिय थे। इसलिए उसने यही दो विषय पढ़ना आरम्भ किया। इन विषयों में वह बहुत ही प्रवीण हो गया। उसकी विद्या और बुद्धि से प्रसन्न होकर पिसा की पाठशाला के अधिकारियों ने उसे उस पाठशाला में गणित का अध्यापक नियत किया। कुछ दिनों में गणित और पदार्थ-विज्ञान में गैलीलियो इतना निपुण हो गया कि अरिस्टाटल और टालमी इत्यादि प्राचीन विद्वानों की भूले वह