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कर्नल आलकट

शव का अग्नि-संस्कार हुआ। अस्थि-सञ्चय का आधा भाग समुद्र में डाला गया। आधा काशी में, भागीरथी में, प्रवाहित किया गया। यह बात हिन्दू-धार्म्मानुकूल हुई।

तीन-चार वर्ष हुए हमने कर्नल आलकट के जीवनचरित की सामग्री इकट्ठी करने की कोशिश की थी। पर सफलता न हुई। जो लोग सामग्री दे सकते थे उन्होंने उत्तर दिया कि कर्नल साहब का जीवनचरित प्रकाशित नहीं हो सकता। साहब नहीं चाहते कि उनका चरित प्रकाशित हो। क्या करते? चुप रहना पड़ा। पर अब, उनकी मृत्यु के बाद, श्रीमती एनी बेसंट ने उनका संक्षिप्त चरित अँगरेज़ी अख़बारो में छपा दिया है। उससे कर्नल साहब का कुछ हाल लोगो को मालूम हो गया है। खै़र, तब न सही, अब सही।

कर्नल साहब के पूर्वज अँगरेज़ थे। उन्हे अमेरिका में आकर बसे कई पुश्तें हो गई। अतएव कर्नल आलकट को अमेरिकन कहना चाहिए। अमेरिका के न्यूजर्सी-प्रान्त के आरेज नगर में कर्नल साहब का जन्म, १८३२ ईसवी में, हुआ था। आपको कृषि-विद्या से बड़ा शौक़ था। ग्रीस की गवर्न- मेट ने उन्हे कृपि के महकमे में एक अच्छा पद देने की इच्छा प्रकट की थी। पर उन्होने एथन्स जाना मंजूर न किया। आपने अपने ही देश में कृषि-विद्या का एक स्कूल खोला। उसमे आपने बड़ी कार्य दक्षता दिखलाई। आपका बड़ा नाम हुआ। आपने कृषि-विषयक एक किताब भी लिखी। थोड़े