पृष्ठ:राष्ट्रीयता और समाजवाद.djvu/२३७

यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

२२२ राष्ट्रीयता और समाजवाद वार पार्टी-सम्मेलनकी सदारत करनेको बुलाया जाना तथा साथी मेहरअली साहबका प्रतिनिधि बनना, मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है । लेकिन उनके स्थानकी पूत्ति पूर्ण रूपसे कोई भी नही कर सकता और इस प्रकार मुझे जो मम्मान प्रदान किया गया है उससे मेरी जिम्मेदारी और भी बढ गयी है । मैं इस महान् गौरवके पदको स्वीकार करनेमें अपनेको कमजोर पा रहा हूँ, विशेषकर ऐसे समयमे जव अनेक महत्त्वपूर्ण प्रश्न हमारे सम्मुख उपस्थित है जिन्हें हमे हल करना है। फिर भी मेरी कर्तव्यभावना मुझे इस सम्मानपूर्ण पदको स्वीकार करनेको वाध्य करती है, और मैं इम प्राणामे इसे स्वीकार करता हूँ कि आप सम्मेलनके कार्य-सचालनमे मुझे अपना हार्दिक तथा उदारतापूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। यह वर्प हमारी पार्टीके लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण वर्प है । एक स्वतन्त्र पार्टीके रूपमें अपने अस्तित्वका हमने पहला साल ही अभी पूरा किया है। पिछले साल नासिकमे हमने अपनी उस पितृ-सस्थासे सम्बन्ध विच्छेद करनेका महत्त्वपूर्ण निश्चय किया था, जिसकी पूरे चौदह वर्पोतक हमने वफादारीके माथ सेवा की थी। उसके बाद कोई भी ऐमी बात नही हुई है जो हमे उस निश्चयपर पुनर्विचार करनेके लिए प्रेरित करे । इसके विपरीत, ज्यो-ज्यो दिन व्यतीत होते जाते है, हमे ऐसे ताजे प्रमाण मिलते जाते है जो इस वातको सिद्ध करते है कि हमारा वह निश्चय बिलकुल सही तथा आवश्यक था । अपनी एक स्वतन्त्र मत्ता स्थापित कर लेनेके वादसे हमारी जिम्मेदारियो तथा हमारे कर्त्तव्योमे कई गुना वृद्धि हो गयी है । आपलोगोमे बहुतसे लोगोको, जो नासिकमे उपस्थित थे, याद होगा कि मैंने वहाँ अपने भापणमे इस बातकी तरफ लोगोका ध्यान आकर्पित किया था कि सम्भव है आनेवाले कुछ दिनोतक हम विल्कुल अन्धकारमे पड़ जायें । हमारी बढ़ी हुई प्रतिष्ठा और प्रभावका एक कारण यह था कि हम बहुत दिनोसे काग्रेससे बँधे चले आते थे। हमे कांग्रेसके अन्दर एक आलोचक दल समझा जाता था जिसका प्रमुख कार्य काग्रेसको क्रान्तिकारी मार्गसे विचलित होकर एक विशुद्ध पार्लियामेण्टरी पार्टी वननेसे रोकना था। हमने इस कार्यको बड़ी सफलतापूर्वक सम्पादित किया, यहांतक कि हमारे नेताअोसे कुछ, जिन्होने १९४२ के संघर्पमे बहुत ही महत्त्वपूर्ण भाग लिया था, देशके नायक वन गये और उनसे पार्टीकी प्रतिष्ठा और जनप्रियता बहुत ही वढ गयी । लेकिन जब हम एक विरोधी पार्टीके रूपमे काग्रेससे बाहर निकल आये, यह सारी चीजे बदल गयी। वहुतसे लोगोने तो हमारे निश्चयके महत्त्वको समझा ही नही । वे सन्दिग्ध और किंकर्तव्य- विमूढ हो गये और इस विचित्र दृश्यको देखकर स्तब्ध रह गये कि समाजवादी-पार्टी काग्रेस-पार्टीकी विरोधी पार्टी बनकर उससे बाहर निकल आयी और उसने काग्रेसके नेतृत्वको चुनौती दे दी। कांग्रेसके लोगोने भी जानबूझकर हमे गलत रूपमे प्रदर्शित करनेकी कोशिश की। उन्होने हमपर एक ऐसे गाढ़े समयमे कांग्रेसकी पीठमे छुरा भोकनेका दोपारोपण किया जब कि सम्पूर्ण देश सकटकालीन स्थितिसे गुजर रहा था । कुछ लोगोने हमपर पितृघातका दोप लगाया । हमारे विरुद्ध तरह-तरहकी गालियोका प्रयोग किया गया और हमको अत्यन्त विकृत रूपमे दिखानेकी चेप्टा की गयी। अतएव हमको जनताको