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राबिन्सन क्रूसो


राय दी। किसी किसी ने उसका प्रतिवाद कर के कहा कि, ऐसा करने से बड़ी खराबी होगी। जाने का उपाय न रहने से वे लोग मरने पर कमर कस कर नाना प्रकार के उपद्रव करेंगे। हिंस्र पशुओं की भाँति जङ्गल भर में घूमते फिरेंगे। उन लोगों के भय से हम लोगों को अकेले बाहर निकल कर काम करना कठिन हो जायगा। तब उन्हें वन्य जन्तुओं की तरह ढूँढ़ ढूँढ़ कर मारना होगा, नहीं तो वे लोग अपने पेट की आग बुझाने के लिए हम लोगों के खेत, खलिहान और पालतू पशुओं को लूट ले जायँगे। एटकिंस ने कहा-यह सही है, सौ मनुष्यों का सामना मैं स्वयं कर सकता हूँ पर सौ जातियों का धक्का कौन सँभालेगा? ये लोग देश को लौट जायँगे तो हम लोगों का प्राण बचना कठिन होगा। असंख्य असभ्य बार बार आकर हम लोगों को सतावेंगे।

उसकी यह बात सभी ने पसन्द की। सभी लोग कुछ सूखी लकड़ियाँ बटोर लाये और आग को अच्छी तरह प्रज्वलित कर डोंगियों को जलाने लगे। यह हाल देख कर असभ्य लोग दौड़ आये और हाथ जोड़ कर धरती में घुटने टेक कर डोंगियों की भिक्षा माँगने लगे। वे लोग इशारे से जताने लगे कि ऐसा अपकर्म हम फिर कभी न करेंगे। एक बार देश जाने ही से हम लोग फिर कभी इस टापू में न आवेंगे। किन्तु उन लोगों का देश लौटना तो हम लोगों के लिए हितकर न था। क्योंकि एक व्यक्ति के लौट कर घर जाने और खबर देने से इतना अनिष्ट हुआ है, जब ये सब के सब देश में जा कर लोगों से यहाँ की बात कहेंगे तब तो हम लोगों का सर्वनाश होना ही सम्भव है। हमारे दल के लोगों ने उन की कातर दृष्टि और गिड़गिड़ाहट पर ध्यान न दे कर उनकी डोंगियों को