पृष्ठ:राजस्थान का इतिहास भाग 1.djvu/३२२

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रबी की फसल से सन् 1818 ई.का 40,000 रुपये रबी की फसल से सन् 1819 ई. का 4,51,281 रुपये रबी की फसल से सन् 1820 ई.का 6,59,100 रुपये रबी की फसल से सन् 1821 ई.का 10,18,478 रुपये रबी की फसल से सन् 1822 ई.का 9,36,640 रुपये अंग्रेजों के साथ संधि होने के पहले मेवाड़ की क्या दशा थी, इस पर पहले लिखा है। संधि के बाद पहले की दशा में परिवर्तन हुआ और राज्य में सभी प्रकार की शांति और सुविधा बढ़ी, जिनसे उन्नति आरम्भ हुई । सन् 1818 से 1822 ईसवी तक राज्य के पाँच प्रमुख नगरों की मनुष्य-गणना का हिसाव नीचे लिखा जाता है। उससे मालूम होता है कि संधि के पहले क्या हालत थी और उसके बाद चार वर्षों में किस प्रकार मनुष्यों की संख्या बढ़ी : जा चुका 80 नगर सन् 1818 ई. में घरों की संख्या सन् 1822 ई. में घरों की संख्या उदयपुर सन् 1818 ई. में 3,500 सन् 1822 ई. में 10,00 भीलवाड़ा | सन् 1818 ई. में 9,000 सन् 1822 ई. में 27,00 पुरा सन् 1818 ई. में 200 सन् 1822 ई. में 1,200 मंडल सन् 1818 ई. में सन् 1822 ई. में 400 गोसुन्द सन् 1818 ई. में 60 सन् 1822 ई. में 250 इस तालिका में जो घर दिखाये गये हैं, वे सब मनुष्यों से भरे हुये थे। यह बढ़ती हुई आबादी इस बात का प्रमाण है कि संधि के पहले लोगों के जीवन में जो अशांति और दुरवस्था थी, वह संधि के बाद दूर हो गयी। इन दिनों में राज्य की खेती ने जो उन्नति की थी, उसे ऊपर लिखा जा चुका है। व्यावसायिक उन्नति का विवरण नीचे दिया जाता है : सन् 1818 ई. में वाणिज्य कर बहुत साधारण सन् 1819 ई. में वाणिज्य कर 96,683 रुपये सन् 1820 ई. में वाणिज्य कर 1,65,108 रुपये सन् 1821 ई. में वाणिज्य कर 2,20,000 रुपये सन् 1822 ई. में वाणिज्य कर 2,15,000 रुपये

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