पृष्ठ:राजस्ठान का इतिहास भाग 2.djvu/८

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में हुआ है। विशाल वंश से हुई थी और उस वश के लोगों को एक ही भापा थी और एक ही धर्म था। जो लोग अपने मूल पूर्वजों के प्राचीन निवास-स्थानों को छोड़कर गङ्गा की तरफ आये, उनका प्रधान बुध का पुत्र भारत नाम का एक व्यक्ति था, जिसने एशिया के इस भाग में आकर अपने राज्य की प्रतिष्ठा की और उसका नाम भारतवर्ष रखा। उसी भारत के वंशज यदुभाटी लोग इस समय इस स्थल के एक कोने में शासन करते हैं। यहाँ की भूमि में जब भारतवर्ष ने उपनिवेश कायम किया, उस समय यहाँ किसी राजवंश के लोग नहीं रहते थे। बल्कि सूर्यवंश और चन्द्रवंश के पहले भील,गोंड और मीणा आदि कई जातियों के लोग यहाँ पर रहते थे। इन जातियों के लोग भी उसी एक विशाल वंश के वंशज थे। लेकिन राजनीतिक पतन के कारण उनकी यह दशा हो गयी थी। इस प्रकार के ऐतिहासिक सत्य का कोई प्रमाण नहीं है, इसलिये हमको यहाँ पर यदुवंशी भाटी लोगो का ऐतिहासिक विवरण देने के लिये हिन्दू ब्राह्मणों के ग्रन्थों का आश्रय लेना पड़ा। गम्भीरतापूर्वक अध्ययन और अनुशीलन के बाद इस बात को स्वीकार करना पड़ता है कि हिन्दुओ में जो आज संकीर्णता मिलती है, उसका जन्म मध्य कालीन युग इसी आधार पर कल्पना की जाती है कि मुसलमानों के भारत पर आक्रमण और अधिकार करने के बाद यह संकीर्णता पैदा हुई है और इसी संकीर्णता से प्रभावित होकर हिन्दुओं का अटक नदी के पार अथवा जहाज पर चढ़कर समुद्र के दूसरी तरफ के देशों में जाना धर्म के विरुद्ध बताया गया है। हिन्दुओं में इस प्रकार की संकीर्णता प्राचीनकाल में न थी। इस सत्य के प्रमाण में बहुत-सी बात कही जा सकती हैं। परन्तु उनके सम्बन्ध में बहुत अनुसन्धान की आवश्यकता है। हिन्दू जाति के लोग प्राचीन काल में जल युद्ध में क्षमताशाली थे और इसीलिये वे लोग अफ्रीका, अरेविया और परसिया तक पहुंचे थे।* यह कहना अत्यन्त भ्रमात्मक है कि हिन्दू जाति सदा से संकीर्ण रही है। क्योंकि हिन्दुओं की मनुसंहिता तथा उनकी प्राचीन धार्मिक और पौराणिक पुस्तकों में इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि वे लोग प्राचीन काल में आक्सस नदी से लेकर गंगा तक के सभी देशों में आते-जाते थे। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार हिन्दुओं ने मध्य एशिया के लोगों को म्लेच्छ कहना आरम्भ किया है। परन्तु वहीं से भारतवर्ष में अनेक प्रकार की विद्या और ज्ञान का प्रचार हुआ है। मनुस्मृति नामक ग्रन्थ में पौराणिक विचारों का समर्थन किया गया है। इसका अर्थ यह है कि उस समय शाक द्वीप से लेकर गंगा के किनारे तक लोगो का एक ही मत था। इस देश के ग्रन्थों में लिखा गया है कि श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद यदुवंश के लोग भारत छोड़कर चले गये। यदुवंश के आदि पुरुप बुध से श्रीकृष्ण तक पचास पीढ़ियाँ व्यतीत हो जाती है। बुध ने भारतवर्ष में आकर सूर्यवंश की कुमारी इला के साथ विवाह किया था। प्राचीन हिन्दू साहित्य के सम्बन्ध मे सर विलियम जोम्स के साथ अनुसन्धान करते हुए मि मार्सडन ने स्वीकार किया है कि मेडेगास्कर से पूर्वी द्वीप तक जो मलायन भाषा प्रचलित है, उसमें बहुत-से सस्कृत के शब्द पाये जाते हैं। उनकी भाषा की यह अवस्था उस समय थी, जब वहाँ के लोगो ने धर्म को स्वीकार नहीं किया था। भागवत में इस बात का उल्लेख मिलता है कि बुध अपने पापों का क्षय करने के लिये भारतवर्ष में आया था।। यहाँ आकर उसने इला नामक सूर्यवंशी कुमारी के साथ विवाह किया था। उस कुमारी से पूलरवा नामक लड़का पैदा हुआ। उसने मथुरा में अपनी राजधानी कायम की और अपने राज्य मथुरा में शासन करता रहा। उसके छः लडके पैदा हुए, उनमें बडे लडके का नाम आयु था। उसने भारत में इन्दुवंश की प्रतिष्ठा की।

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