पृष्ठ:राजस्ठान का इतिहास भाग 2.djvu/२३६

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रणथम्भौर के दुर्ग पर बादशाह अकवर को सफलता न मिलने पर मानसिंह ने अपनी राजनीति से काम लिया। उसने राव सुरजन को किसी प्रकार बादशाह की अधीनता में लाने का निश्चय किया। उसने अनेक प्रकार की योजनायें बनाकर राव सुरजन से भेंट करने के लिये अपना सन्देश भेजा। बूंदी का राजा राव सुरजन उसे सजातीय समझता था। इसलिये उस पर विश्वास करके उसने उसको रणथम्भौर के दुर्ग में बुला लिया। मानसिंह के साथ वादशाह अकबर भी अपने आप को छिपाकर उस दुर्ग में गया। दोनों ने वहाँ पहुँचकर राव सुरजन से भेंट की और मानसिंह के साथ उसकी बातचीत आरम्भ हुई। वहाँ पर रांव सुरजन का चाचा भी मौजूद था। उसने वेश बदले हुए अकबर को पहचान लिया। उसने तुरन्त अकबर को सम्मानपूर्वक एक ऊँचे स्थान पर बिठवाया। अकबर ने बड़े शिष्टाचार के साथ राव सुरजन से कहा "राव साहब क्या होना चाहिये?" इसी समय मानसिंह ने राव सुरजन की तरफ देखा और अपनी आत्मीयता को प्रकट करते हुए उसने उससे कहा- "आप चित्तौड़ के राणा की अधीनता को तोड़कर रणथम्भौर का दुर्ग बादशाह को दे दीजिये।" बादशाह की अधीनता स्वीकार करने के बाद आपको वह सम्मान प्राप्त होगा, जिसकी आप कभी कल्पना नहीं कर सकते। आपके शासन की मियाद बढ़ेगी और एक विशाल राज्य की आमदनी के आप स्वतंत्र अधिकारी होंगे। बादशाह का उसमें कोई अधिकार न होगा। लेकिन आप अपनी सेना के साथ बादशाह के आदेशों का पालन करेंगे। आप अपनी आवश्यकताओं के सम्बन्ध में जो कुछ प्रार्थना करेगे,वादशाह सम्मानपूर्वक उसे पूरा करेगा। मैं इस प्रकार की बातें आपकी मान-मर्यादा को बढ़ाने के लिये कह रहा हूँ।" बातचीत में मानसिंह ने बादशाह की तरफ से अनेक प्रकार के प्रलोभन राव सुरजन के सामने रखे। वह मानसिंह को सजातीय समझता था। इसलिये वह मानसिंह की बातों से प्रभावित हुआ और उसने कुछ शर्तों के साथ मानसिंह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उसी समय दोनों पक्षों के बीच एक सन्धि का होना निश्चय हुआ और राव सुरजन ने बादशाह अकबर के साथ उस समय जो सन्धि की, वह इस प्रकार थीः (1) बूंदी के राजवंश की कोई लड़की किसी भी समय दिल्ली के बादशाह को नहीं दी जाएगी। (2) बूंदी राज्य की तरफ से बादशाह को कभी जजिया कर नहीं दिया जायेगा। (3) बूंदी के राजा को अटक के बाहर युद्ध करने के लिए जाने का पूर्ण रूप से अधिकार होगा और इस अधिकार के विरुद्ध बादशाह की तरफ से उसे कोई आदेश कभी न दिया जायेगा। (4) नौरोजा के उत्साह में बादशाह की तरफ से जो मीणा बाजार लगता है और जिसमें राजपूत राजाओं और सामन्तों की स्त्रियाँ शामिल की जाती हैं, उस मीना बाजार में बूंदी के राजा और उसके सामन्तों की स्त्रियाँ कभी बुलायी न जाएँगी। (5) बादशाह के दरबार में बूंदी के राजा को सशस्त्र जाने का अधिकार होगा। (6) बूंदी राज्य के देव स्थानो पर किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार न किया जाएगा। 228