पृष्ठ:राजस्ठान का इतिहास भाग 2.djvu/२०९

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में विशेष रूप से की गयी है। हर्पराज का प्रताप अरावली के शिखर से लेकर आबू के शिखर तक एवम् पूर्व में चम्बल नदी तक फैला हुआ था। उसने सम्वत् 812 से 827 तक शासन किया। युद्ध में उसने आश्चर्यजनक पराक्रम का प्रदर्शन करके अन्त में अपने प्राणों की आहुति दी। तवारीव फरिश्ता में लिखा है कि एक सौ तैंतालीस हितरी में मुसलमानों की संख्या बहुत बढ़ गयी थी। बहुत बड़ी संख्या में उन्होंने पर्वत से आकर किरमान, पेशावार और दूसरे अनेक प्रसिद्ध स्थानों पर अधिकार कर लिया। अजमेर के राजा का वंशीय लाहौर में शासन करता था। उसने इन अफगानों के विरुद्ध युद्ध करने के लिए अपने भाई को भेजा। उसके साथ कावुल के खिलजी औरगोरी जाति के लोगों ने मिलकर अफगानों के साथ युद्ध किया। लेकिन अन्त में उनको इस्लाम धर्म मन्जूर कर लेना पड़ा। पाँच महीने के समय में राजपूत घवराकर और परास्त होकर भाग गये। लेकिन शीतकाल के दिन व्यतीत हो जाने पर राजपूतों ने नयी सेना के साथ फिर से युद्ध की तैयारी की और राजपूतों की सेना पेशावर के मध्यवर्ती स्थानों में पहुँच गयी। दोनों तरफ से फिर भयानक संग्राम आरम्भ हुआ। उस युद्ध में कभी राजपूत विजयी होकर अफगान सेना को परास्त करके कोहिस्तान तक अधिकार कर लेते और कभी अफगानी फौज राजपूतों को पराजित करके पीछे हटा देती। अजमेर का राजा इन युद्धों में कभी शामिल हुआ था अथवा नहीं, इसका कोई उल्लेख राजपूतों के ऐतिहासिक ग्रन्थों में नहीं मिलता। हमीर रासा में लिखा है कि हर्प राजा के बाद दुजगनदेव अथवा दुर्जदेव सिंहासन पर वेठा था। दुजगनदेव ने नासिरूद्दीन नामक मुस्लिम सेनापति को युद्ध में पराजित करके उसके बारह सों घोड़े अपने अधिकार में कर लिये थे। महमूद के पिता सुवुक्तगीन का दूसरा नाम नासिरुद्दीन था। अलप्तगीन के पन्द्रह वर्षो के शासन में सुवुक्तगीन अनेक बार भारतवर्ष पर आक्रमण करने के लिए आया था। इसके बाद बीसलदेव के समय तक की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना नहीं मिलती। राजा वीसलदेव के पिता का नाम हाड़ा जाति की वंशावली के अनुसार, धर्मराज था। परन्तु जागा की वंशावली में उसका नाम वेलनदेव लिखा गया है। अनुसंधान करने से पता चलता हे कि उसका वास्तविक नाम वेलनदेव था। वह धार्मिक मनुष्य था। इसलिए उसको धर्मराज की उपाधि मिली थी। दिल्ली के विजय स्तम्भ में एक प्रस्तर पर लिखा हुआ जो कुछ पढ़ने को मिला है उससे भी इसी वात का समर्थन होता है कि सुलतान महमूद ने अन्तिम बार जब भारत पर आक्रमण किया था, उस समय वेलनदेव सिंहासन पर था। उसने युद्ध करके सुलतान महमूद को पराजित किया था और उसे अजमेर से भगा दिया था। परन्तु वह भी उस युद्ध में मारा गया। गोगा चौहान नामक एक लड़का बच्चा राजा का था। उसने बहुत गौरव प्रान किया और सतलज से हरियाणा तक समस्त विस्तृत जाँगल भूमि को उसने अपने अधिकार में कर लिया था। सतलज नदी के किनारे महलावा "गोगा की मंडी" नामक टमनी रानी थी। सुलतान महमूद के आक्रमण से अपनी राजधानी को सुरक्षित रखने के लिए गांगा हान ने भयानक युद्ध किया था और अन्त में अपने पैताला लड़कों और माठ भतीनों के नायव्ह 201