पृष्ठ:राजस्ठान का इतिहास भाग 2.djvu/१२२

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भीतर पहुँच गया। उसने माता के स्थान पर भाटी सामन्त उग्रसेन को देखा। उग्रसेन ने उसी समय विजय सिंह के हाथों और पैरों को बांध कर पालकी में बैठा दिया और पालकी सांगानेर से आमेर राजधानी की ओर रवाना करवा दी। बाहर के सभी लोगों ने समझा कि राजमाता की पालकी राजधानी वापस जा रही है। एक घन्टे के पश्चात् जयसिंह को समाचार मिला कि विजय सिंह कैदी होकर दुर्ग मे आ गया है। इसके कुछ समय बाद सैनिकों के साथ जयसिंह को अकेले आता हुआ देखकर सामन्तो ने पूछा- "विजय सिंह कहाँ है?" सामन्तो के इस प्रश्न को सुनकर जयसिंह ने कहा- "मेरे पेट में है। अपने पिता के हम दोनों बेटे हैं। बडा होने के कारण राज्य का मैं अधिकारी हूँ। राज सिंहासन से उतारने के लिए उसने मेरे साथ जो पड़यन्त्र किया था, उसका बदला मुझे विश्वासघात के द्वारा देना पड़ा। उसने हम सबका सर्वनाश करने के लिए आमेर राज्य में शत्रुओं को आमन्त्रित किया था। मैंने जो कुछ किया है, इसके सिवा मेरे पास और कोई उपाय न था।" जयसिह के इस उत्तर को सुनकर सभी सामन्त आश्चर्यचकित हो उठे। किसी ने कुछ उत्तर न दिया। वे सभी उस स्थान से चले गये। सांगानेर के बाहर मुगल बादशाह की छः हजार अश्वारोही सेना खडी थी। प्रधानमंत्री कमरुद्दीन खाँ ने उस सेना को विजयसिंह की सहायता के लिए भेजा था। विजय सिह को न पाने के बाद मुगल सेना के अधिकारी ने जयसिंह से पूछा- "विजय सिंह कहाँ है?" जयसिंह ने रोप में आकर उत्तर दिया- "तुम्हे इसके पूछने का क्या अधिकार है? तुम लोग यहाँ से वापस चले जाओ, नहीं तो तुम सबके घोड़े छीन लिए जाएंगे।" उस सेना के अधिकारी ने कुछ उत्तर न दिया और मुगल सेना वहाँ से वापस लौट गयी। विजयसिंह इस प्रकार कैदी हो गया। सवाई जयसिह के समय कछवाहो के राज्य ने सभी प्रकार की उन्नाते की। इसके पहले वहाँ पर जो लोग आमेर के सिहासन पर बैठे, उन्होंने मुगल बादशाह के दरवार में सम्मान प्राप्त किया था। लेकिन उनमे से किसी ने सवाई जयसिंह की तरह अपने राज्य की उन्नति नहीं की। बादशाह बावर से लेकर औरंगजेब के समय तक मुगल बादशाह का आमेर के राजाओ के साथ पारिवारिक सम्बन्ध रहा। परन्तु कोई कछवाहा राजा अपने राज्य की सीमा का विस्तार नहीं कर पाया था। औरंगजेव की मृत्यु के बाद मुगलों की शक्ति कमजोर पड़ गयी और मुगलो का शासन बहुत-से टुकडो में विभक्त होता जा रहा था। इसके पहले मुगल साम्राज्य मे आमेर राज्य का कोई विशेप स्थान न था। औरंगजेब के मर जाने के बाद मुगलो के राज मे बहुत-से उपद्रव पैदा हो गये थे। उन दिनो में सवाई जयसिंह को बादशाह की तरफ से आगरा का शासक नियुक्त किया गया था। इस समय की सुविधाओं का लाभ उठाकर सवाई जयसिह ने अपने राज्य की उन्नति की। राजा जयसिह के आमेर के सिहासन पर बैठने के समय आमेर, दौसा और बिसाऊ नामक केवल तीन परगने उस राज्य में थे और इन्ही तीनों नगरो से बने हुए राज्य का नाम आमेर अथवा अम्वेर राज्य था। इसके पश्चिम की तरफ के सभी नगर बादशाह के अधिकार 114