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हरिऔध--]
[--रस-साहित्य-समीक्षाएँ
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वेनिस का बाँका ( अनुवाद ) तथा ठेठ हिन्दी का ठाट और अधखिला फूल लिखा। ये कृतियाँ उनकी शब्द-अधिकार की आख्याधिकाएँ हैं। बीसवीं शताब्दी में लिखा गया उनका साहित्य विशेष महत्व का है।

बीसवीं सदी (ईसा) के प्रारम्भ में एक नयी सामाजिक चेतना की जाग्रति भारतवर्ष में हुई। काँग्रेस से देश में राष्ट्रीय तत्वों को बल मिलने लगा। बंग-भंग और होमरूल आन्दोलन नयी स्फूर्ति जगाने में सफल हुए। लोगों के भीतर नया आत्मबल, नयी स्फूर्ति और स्वतन्त्रता के लिए नयी चेतना जाग्रत होने लगी। क्रान्तिकारी वीर युवकों के समय-समय पर किये गये साहसिक कार्यों की प्रतिक्रिया लोगों के मन पर नयी चेतना बनकर छा गयी। आवागमन के साधन, जो अंग्रेजों के शासन को दृढ़ करने के प्रमुख उपकरण समझे गये थे, वे ही समस्त भारत में बिखरे विशाल जनसमूह को एक आदर्श, एक भावना और एक आवश्यकता--स्वतन्त्रता के लिए एक सूत्र में बाँधने लगे। देश में पत्र-पत्रिकाओं के व्यापक प्रसार तथा काँग्रेस के संगठन ने लोगों में जान फूँक दी। विदेशी के बायकाट और स्वदेशी आन्दोलन से जनता को बड़ा बल मिला।

हिन्दी के प्रसार और प्रसार का आन्दोलन भी व्यापक रूप ग्रहण करने लगा।

भारतेन्दु-युग की रचना

भारतेन्दु-युग में ही गद्य के क्षेत्र में खड़ी बोली का आधिपत्य स्थापित हो चुका था, पर बीसवीं सदी के प्रारम्भ तक काव्य के क्षेत्र में ब्रज और खड़ी बोली के प्रश्न पर विद्वानों में मतान्तर चलता रहा। यद्यपि भारतेन्दु मंडल के प्रायः सभी कवियों ने प्रयोग रूप में खड़ी बोली में रचनाएँ कीं, तो भी वे अपनी असफलता को