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सुल‍्ताना
रज़ीयाबेगम

वा
रङ्गमहल में हलाहल



(उपन्यास)
पहिला भाग।



पहिला परिच्छेद.

दिल्ली में धूम।


"हमेशा बदलता है ऐसा ज़माना।
कि है आज इसका, कल उसका ज़माना॥
दिखाता है नौरङ्ग क्या क्या ज़माना।
बहुत याद आता है पिछला ज़माना॥"

(सफ़दर)

दिल्ली में आज बड़ी धूम है! जो दिल्ली, या देहली भारतवर्ष का ऐतिहासिक केन्द्र है, जहांके हिन्दू राजराजेश्वरों ने बहुत काल तक सारे भूमण्डल पर अपनी राजसत्ता चलाई थी और जो पीछे मुसलमानों की गुलामी में दाख़िल हुई, उसी दिल्ली में आज महोत्सव है!

महर्षि वाल्मीकि ने कहा है कि,–'जो वस्तु हुई है, उसका